Wrong Number: Season 1





Wrong Number....

Chapter_1

 


वैसे तो मुझे ज्यादा सुबह तक सोने की आदत नहीं है लेकिन कल  देर रात तक व्हाट्सएप फेसबुक के चक्कर में कुछ ज्यादा ही जागता रह गया था । 


        जिसके कारण आज सुबह टाइम से नींद नही खुल पाया था । जब मैं सुबह  बेड पर सो रहा था तभी अचानक मेरे मोबाइल की रिंग बजी ।  रिंग की आवाज सुनकर थोड़ी चिढ़ हुई पर किसी तरह बेड से उठकर कॉल को रिसीव किया । 

  मैंने बोला " हेल्लो "     


"  अब तक सो रहे हो ? "  कॉल पर उधर से किसी लड़के की आवाज आई ।


 मैंने सोचा कोई अपनी ही फैमिली से होगा तो मैंने कह दिया "  हां  ! अब तक सो रहा हूं ।"

  इतना बोलने के बाद कॉल की दूसरी तरफ से मुझे डांटने की आवाज सुनाई देने लगी "

 तुम हॉस्टल में पढ़ने के लिए गए हो या दिन भर सोने के लिए , अगर तुम इतना सोओगे तो एक्जाम कैसे क्लियर कर पाओगे ?  रुको , मैं अभी पापा को कॉल करके बताता हूं कि आपका लाडला अब तक सो रहा है ।" 

 मैं इन बातों को खामोश होकर सुनता रहा । मुझे यह समझ में नहीं आ रहा था कि मैं  कब से हॉस्टल में रह रहा हूं और कौन सा एक्जाम क्लियर करना है ।

 खैर !  अब तक मुझे पूरी तरह से समझ में आ चुका था कि यह किसी रॉन्ग नंबर की कॉल आ रही है ।

 मुझे चुप देखकर वह फिर बोला "  इतने चुप क्यों हो ?  क्या हुआ ? "


 अब मुझे भी रहा नहीं गया और मैंने साफ-साफ सब कुछ बता दिया कि आपने रॉन्ग नंबर पर कॉल किया है । यह सुनकर हुआ वह सन्न रह गया ।


 वह बोला "  सॉरी ,  मैंने अपने भाई के पास कॉल किया था ।  न्यू एंड्रॉयड फोन रहने के कारण मेरे मोबाइल में भाई का नंबर सेव नहीं था जिसके कारण गलत नंबर डायल हो गई  ।  मुझे माफ कर दो "


 मैंने कहा "  ठीक है  , कोई बात नहीं । लेकिन आपने तो मेरी दिन ही खराब कर  दिया ।  बेवजह सुबह-सुबह डांट लगा दिया आपने । " 

 उसने माफी मांगने के बाद कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया ।  लेकिन सच कहूं ?  उससे बात करके बहुत अच्छा लग रहा था ।

  उसका डांटना गजब की अपनापन महसूस  करवा रहा था ।

 इसके बाद मैंने इन सब से ध्यान हटाकर ऑफिस के लिए तैयार हुआ और उसके बाद 9:15 बजे ऑफिस पहुंच गया । 

 लेकिन आज ऑफिस में भी मन नहीं लग रही था । कुछ सुना - सुना सा महसूस हो रहा था ।

 मुझे उस से दूबारा बात करने का दिल कर रहा था  और ऑफिस में ज्यादा काम नहीं होने के कारण बोरियत भी महसूस हो रही थी ।

 मैंने अपनी पॉकेट से मोबाइल निकाल कर  उसकी नंबर पर कॉल करने की सोचा लेकिन मुझे कॉल करने की हिम्मत नहीं हो रही थी ।

"पता नहीं वह मेरे बारे में क्या सोचेगा "  यह सोच कर मैं कॉल नहीं कर पा रहा था ।

 मैं अपने मोबाइल को टेबल पर रखकर कुछ काम करने लगा  कुछ समय बाद अचानक मेरे मोबाइल की स्क्रीन लाइट जली और SMS आने की आवाज आई । 

 वैसे मैं  SMS  पर  ध्यान नहीं देता हूँ । लेकिन यह s.m.s. उसी नंबर से था जिस नंबर से सुबह कॉल आई थी । मैंने झट से अपने मोबाइल का पैटर्न को खोला और मैसेज को देखा ।

           ये  क्या ?  उसने फिर से सॉरी लिख कर भेजा है ।

 अब मुझे भी उससे बात करने का अच्छा मौका मिल चुका था। और मैंने भी उसे मैसेज रिप्लाई कर दिया ।

  फिर क्या !  s.m.s. की बाढ़ आ गई । और  दिनभर  एक दूसरे  को  एसएमएस भेजते रहे ।

  और हम दोनों अगले 4 दिनों तक एस एम एस के द्वारा ही बात करते  रहे ।

  अब शाम Funny SMS  से गुजरता तो सुबह प्यार भरी लव SMS   से होती ।

 कुछ ही दिनों में हम दोनों एक बहुत ही अच्छा दोस्त बन गए  और फोन पर प्रतिदिन घंटे - घंटे बात होने लगी ।

 उसने अपना नाम श्रेयांश बताया और वह लक्ष्मी नगर  दिल्ली  में रहता  है तथा वो अभी ग्रेजुएशन कर रहा है । 

 मैंने भी उसे अपने दिल की सारी बातें बता दि और उसकी दोस्ती कब प्यार में बदल गई कुछ पता ही नहीं चला ।

 मैंने दिन में ही उसका ख्वाब देखना शुरू कर दिया और उस से जुड़कर जिंदगी एक हसीन सपना दिखाने लगा ।  मेरे हर सपने में सिर्फ वह और मैं होता था । 

 अब तो जिंदगी का हर सपना उसके करीब से जुड़ता जा रहा था । उसकी बात ने  गजब का जादू कर दिया था । 

 हम दोनों ने फोन पर ही कई वादे किए जिसमें से एक वादे साथ में जीने मरने की  भी  थी ।

            अब हम दोनों को बात करते करते लगभग 6 महीने से अधिक बीत चुके थे ।

 एक दिन मैंने श्रेयांश से  मिलने की जिक्र किया और उसने भी हामी  भर दिया । उसकी सहमति सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था ।

 हम दोनों ने काफी सोच विचार करके नेहरू पार्क में  मिलने के लिए जगह चुना  । यह पार्क लक्ष्मी नगर से नजदीक हैं इसलिए   उसने भी इसी पार्क का सुझाव दिया  ।

 मैंने 2 दिनों बाद रेलवे की कंफर्म टिकट बुक करा कर दिल्ली के लिए निकल पड़ा ।

 उससे मिलने से पहले ही मैंने कई सपने संजो चुके थे । 


 ट्रेन पर सारी रात उससे बात होती रही वह भी  मुझसे मिलने के लिए काफी उतावला प्रतीत हो रही था । हम दोनों  को ऐसा लग रहा था काश  ! यह रेलगाड़ी हवाई जहाज की तरह तुरंत हमे उसके पास पहुंचा दें  । 

 कल 9:00 AM बजे सुबह मैं रेलवे स्टेशन दिल्ली जंक्शन के प्लेटफार्म  नम्बर 8  पर खड़ा  था ।

 मैंने अपने मोबाइल को निकाल कर श्रेयांश के मोबाइल नंबर पर कॉल किया तो वह  फोन पर थोड़ी परेशान दिखा मैंने उससे इस परेशानी की वजह पूछी तो वह कुछ बताने से इंकार करते हुए बोला "   मैं आपको  मिलकर बताता   हूँ " 

 इसके बाद  मैं नेहरू पार्क जाने के लिए एक ऑटोैं मे बैठ गया ।  लेकिन पता नहीं क्यों ?  उसे परेशान देखकर मेरे अंदर एक अलग सी डर घर कर गई था ।

   "  सर!   पहुंच गई आपकी मंजिल "  ऑटो ड्राइवर ने मेरा ध्यान भंग करते हुए बोला ।


 मैं उस जगह पर पहुंच कर उसके नंबर पर कॉल लगाया लेकिन उसका नंबर स्विच ऑफ  बताने लगा । 

 मैं काफी परेशान हो गया और बार-बार नंबर पर कॉल करता रहा ।  लेकिन उसका नंबर स्विच ऑफ ही  बताता रहा  ।  लगभग 2 घंटे तक  कोशिश करने के बाद उसके नंबर पर कॉल नहीं  लगी तब मैं थक- हारकर वही चबूतरे पर बैठ गया और उसका इंतजार करने लगा । 


 सुबह से शाम होने को आ गई थी लेकिन उसका कोई अता-पता नहीं था । अब तुम मुझे यकीन होने लगा था की  अब वह आने वाला नहीं है ,  वह मुझे बेवकूफ बनाया हैं और मुझे धोखा दिया है ।

 लेकिन श्रेयांश से इतने दिनों तक बात किया और कल तक की बाते  याद करता  हूँ  तो मुझे यकीन नहीं होता कि वह मुझे धोखा दे सकता है ।  क्योंकि  जितना खुशी मुझे श्रेयांश से मिलने को लेकर था उतना ही खुशी मुझसे मिलने के लिए उसे हो रही था ।

"   आखिर क्या बात होगी ?  जो वह  मुझसे मिलने नहीं आया । "  यह प्रश्न मेरे दिल हमेशा मुझसे पूछ रहा था ।

 उसने मुझसे इतना दिनों तक बात किया और आज तक ऐसा महसूस नहीं होने दिया कि वह कभी मुझे धोखा  दे सकता है ।

   अब तो इस हालात में मेरे दिमाग भी सही से काम नहीं कर रहा था ।   मैं वहां से वापस आने से पहले उसको ढूंढना चाहा पर मेरे दिमाग ने इसकी सहमति नहीं दिया और मैं वहां दो दिनों तक इंतजार करने के बाद पुनः अपने घर वापस आ गया । 


 घर आने के बाद सब कुछ बेगाना सा महसूस हो रहा था ।  उससे बात किए बिना मेरा दिन ही नहीं गुजार रहा था   ।  इतना कुछ होने के बाद भी मैं वापस आने के बाद उसके कॉल का इंतजार करता था ।  सोचता था शायद ! वह कॉल कर दे कभी ।

 आज मुझे दिल्ली से लौटे हुआ 3 महीने हो चुके है  लेकिन अब तक उसका कॉल कभी नहीं आया । 

एक रॉन्ग नम्बर ने मेरी पूरी जिंदगी को हिलाकर रख दिया ।

 अब मैं कुछ दिनों से उसे भुलाने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन मेरे दिमाग में एक प्रश्न बार बार आता है "  जब श्रेयांश  अंतिम बार बात कर रहा था तो वह इतना  परेशान क्यों था ?  क्या वह  किसी मजबूरी के कारण नहीं आ पाया था ?  अगर हां ,  तो क्या मजबूरी हो सकती है ? " 


 खैर ! जो भी हो ।  मैं उस रॉन्ग नंबर को जिंदगी का सबक नंबर बना लिया हूँ ।  और जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा हूं ।

               अब मुझे समझ आ चुकी है  कोई नंबर रॉन्ग नहीं होता ,  इंसान  के मकसद रॉन्ग होते हैं ।


Chapter_2



वेदांत का दिल टूट चुका था वह ये सोचता है श्रेयांश ने उसे धोखा दिया है अब प्यार से भी उसका भरोसा उठ चुका था ।


उसे ये लगने लगा था कि सच्चा प्यार जैसी कोई चीज़ नहीं होती है। ये सब बकवास बाते है। इन सब का जिम्मेदार वह श्रेयांश को मानता है। 


एक महीने बाद…..


 वेदांत अब भी श्रेयांश को याद करके रोता है और अपने आप से सवाल करता है ,क्यों नहीं आए तुम उस दिन क्यों, आखिर ऐसी क्या वजह थी जो तुम नहीं आए । एक call ना सही कम से कम msg करके तो बता ही सकते थे अपनी परेशानी पर तुमने मुझे अपना समझा नहीं । वह सब वादे , वो प्यार की बातें सब झूठ थी।


इधर श्रेयांश के पास राज और हिमांशु मिलने आते है….(मेरे अजनबी हमसफ़र के किरदार)


राज :- तू उस से मिलने क्यों नहीं गया ,वो तेरे से मिलने के लिए यहां आया था और तू उससे मिला भी नहीं । ये तूने ठीक नहीं किया ….


हिमांशु :- आप एक बार उनकी बात तो सून लीजिए, उनपर गुस्सा क्यों रहे हों आप….ऐसे गुस्सा करने से कोई हल नहीं निकलेगा ।


राज :- गुस्सा ना करू तो और क्या करू बाबू तुम तो जानते हो ना जब आप किसी से प्यार करते है तो उसके बिना रहना कितना मुश्किल होता है और ये पागल इंसान , इसके पास प्यार खुद चल के आया और इनसे उसे ठुकरा दिया । 


श्रेयांश ने एक फाइल राज की तरफ़ बढ़ाई…..और कहा इसे देखकर आपको सब समझ आ जायेगा।


राज वो फाइल देखने लगता है उसके ऊपर city hospital लिखा होता है , ये फाइल श्रेयांश के नाम की होती है । 


राज :- तूने मुझसे इतनी बड़ी बात छुपाई , मैं तेरा भाई हूं सौतेला ही सही लेकिन भाई हूं और तूने मुझसे इतनी बड़ी बात छुपा ली ।कैसे छुपा सकता है तू , तू मुझे अपना कुछ मानता ही नहीं है इसलिए तूने मुझे कुछ नहीं बताया…तेरे अलावा मेरे परिवार में कौन है ,,, mom के जाने के बाद dad ने तुम्हारी mom से शादी कर ली … माना कि मैंने उन्हें कभी अपनी मां नहीं माना पर तुझे अपना छोटा भाई ज़रूर माना था । बचपन में तुझे कुछ हो जाता तो मेरी जान निकल जाती थी। पर जब पिछले साल उन दोनों की भी मौत हो गई थी तो तूने मुझे कुछ नहीं बताया था।बाहर वालों से मुझे ये बात पता चली थीं। क्या मैं तेरे लिए इतना पराया हूं 😭😭😭 मैं तुझे हाथ जोड़कर कहता हूं मेरा छोटा भाई मुझे लौटा दे😭😭


श्रेयांश :- भाई आप ऐसा मत कहो आप मेरे बड़े भाई हो मैं भी आपसे उतना ही प्यार करता हूं जितना आप मुझसे करते है।आज आपको यहां यही बात बताने के लिए बुलाया था  पर आप मेरी बात सुनते कहा हो । जब देखो तब मुझपर गुस्सा करते रहते हो , बचपन में भी ऐसे ही थे । पता नहीं हिमांशु भाई आपको कैसे झेलते है...😁😁😁


हिमांशु ये बात सुन कर हसने लगता है…


राज :- क्या बोला तूने मैं तेरे ऊपर गुस्सा करता हूं , तू काम ही ऐसे करता है कि तुझपर गुस्सा किया जाए..


हिमांशु के तरफ़ देखकर ….


तू क्या खी खी कर के दांत निकाल रहा है तुझे तो मैं घर जाकर बताता हूं।


हिमांशु :- वैसे इस फ़ाइल में ऐसा क्या है जो आप इतना परेशान हो रहे हैं।


राज हिमांशु की तरफ फाइल करते हुए कहता है लो खुद ही देख लो…


हिमांशु वो फाइल देखता है , उसने जो लिखा होता है उसे पढ़कर उसके होश उड़ जाते है…


हिमांशु :- इसमें जो लिखा है वह सच है , इसलिए तुम वेदांत से मिलने नहीं गए। 


श्रेयांश :- हां हिमांशु भाई ये सच है और इस लिए ने उनसे मिलने नहीं गया । मैं नहीं चाहता कि जब मैं ना रहूं तो वो मुझे याद करके अपनी ज़िन्दगी बर्बाद करे । इसलिए मैंने उन्हें ना कोई call कि और ना ही कोई msg । उनका नंबर भी मैंने block कर दिया। ताकि वो मुझतक ना पहुंच सके।


हिमांशु :- ये सब कैसे हुआ?? और कितना वक़्त बचा है??


श्रेयांश :- उस दिन जब मै वेदांत से मिलने जा रहा था , तो अचानक बेहोश गया । वहा खड़े लोगों ने मुझे पास के hospital मे भर्ती कराया ।

                    मेरा फोन टूट गया था इसलिए उस समय किसी को call करके infrom नहीं कर पाया कोई । डॉक्टर ने check-up किया तब जाकर  पता चला कि मुझे cancer है, जो कि last stage पर पहुंच चुका है और मेरे पास ज्यादा से ज्यादा एक साल है।


इतना सुनते ही राज और हिमांशु दोनों के आंखो में आंसू आ जाते है और दोनों श्रेयांश को गले लगा लेते है...


श्रेयांश बोलना जारी रखता है……..


मैं नहीं जानता वो मेरे बारे में क्या सोचता होगा ? शायद मुझे बेवफ़ा समझता होगा। पर मैं ये नहीं चाहता कि मेरे जाने के बाद वेदांत अपनी ज़िन्दगी वही ना रोक ले, उसे आगे बढ़ना होगा पर मैं ये भी जानता हूं कि वो मुझसे बहुत प्यार करता है .. इसलिए मेरे जाने के बाद अपनी ज़िन्दगी में किसी को मेरी जगह नहीं दे पाएगा वो…  इसलिए हम दोनों का ना मिलना ही एक दूसरे के लिए ठीक रहेगा…


जरूरी नहीं हर मोहब्बत की कहानी पूरी हो कुछ मोहब्बत की दास्तां अधूरी रह जाती है । मेरी क़िस्मत में मेरी मोहब्बत पूरी होने लिखी ही नहीं थी।


राज :- और तेरा क्या , तू रह लेगा उसके बिना ….. मैने तेरी आंखों में जो उसके लिए प्यार देखा है उसका क्या .. माना कि तेरे पास कम समय बचा है पर जितना भी उस वक़्त में तुझे अपने प्यार के साथ होना चाहिए।


श्रेयांश :- भाई ! मेरा भी सपना था कि मेरे आखिरी सांसे मेरे महबूब के बाहों में ही लू … उसके साथ ज़िन्दगी की हर खुशी हर गम बिताऊ… उसके साथ प्यार भरी बातें करू ,जैसा आप हिमांशु भाई के साथ करते है। पर मेरा ये सपना कभी पूरा नहीं हो पाएगा भाई ,मेरा प्यार अधूरा रह गया भाई...😭😭😭


राज :- मैंने तुझे ऐसे दुःखी नहीं देख सकता छोटे!, मैं तुझे तेरे प्यार के पास ले चलूंगा , उसके सामने हाथ जोड़कर उससे प्रार्थना करुगा की तुझसे नफ़रत ना करे। तेरे आखिरी वक़्त में तेरे साथ रहे ।तू बता कहा रहता है वो मैं जाऊंगा उसके पास बता मुझे कहा रहता है वो….


हिमांशु :- राज मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगा । आखिरकार श्रेयांश मेरा भी तो भाई है । श्रेयांश आप बताइए कहा रहते है वो हम दोनों उनके पास जायेंगे।


श्रेयांश :- भाई मै आपको उनका पता बताऊंगा पर मेरी एक शर्त है…


राज :- कैसी शर्त ।


श्रेयांश :- मैं भी आप दोनों के साथ चलूंगा…


राज :- पागल हो गया है तू कैसे जा सकता है अपनी हालत देखी है तूने।


श्रेयांश :- मेरी यह बात मानोगे तभी आपको उनका पता मिलेगा।


राज :- ठीक है तू भी चलेगा हमारे साथ अब खुश . 


श्रेयांश :- बहुत ही ज़्यादा …. उन्होंने एक बार कहा तो था कि वो पटना में रहते है पर पटना में कहा रहते है ये मुझे नहीं पता।  


हिमांशु :- ये तो पता चला कि वो कहा रहते है बाकी वो पटना मै कहा रहते है…. ये तो चुटकियों में पता कर लूंगा । ये काम तुम दोनों मुझ पर छोड़ दो।


अगले हफ़्ते…..


तीनों वेदांत के घर के सामने पहुंच चुके थे ,वहा पर शायद किसी की शादी हो रही थी क्यूंकि घर को पूरा सजाया गया था….।






Chapter_3



राज हिमांशु और श्रेयांश पटना पहुंच जाते है और वेदांत के घर के सामने खड़े होते है।


राज :- तुझे कैसे पता ये वेदांत का घर हैं….


हिमांशु :- बस पता चल गया … हम भी जेम्स बॉन्ड से कम थोड़े है...😁😁


राज :- ओह मेरे जेम्स बॉन्ड बता भी दे कैसे पता किया तूने


हिमांशु :- मैंने श्रेयांश से जीजू का नंबर ले लिया था फिर कुरियर वाला बनकर उनसे उनके घर का पता कर लिया


श्रेयांश ( शर्माते हुए) :- जीजू🙈🙈😁


राज :- पर लगता है यहां तो किसी की शादी हो रही है…..


तभी कोई घर के अंदर से कोई औरत निकलती है उन तीनों को देखकर उनसे पूछती है …


औरत :- आपलोग कोन है , किससे मिलना है??


हिमांशु :- जी हम दिल्ली से आए है वेदांत से मिलना है।


औरत :- आप सब वेदांत के दोस्त है ,पर वेदांत ने मुझको तो कुछ बताया नहीं उसके दोस्त भी शादी में आ रहे है..।


श्रेयांश :- किसकी शादी हो रही है आंटी???


औरत :- अपने दोस्त की शादी में आए हो और पूछ रहे हो किसकी शादी हो रही है ,,, अच्छा मज़ाक करते हों बेटा अंदर आ जाओ अपने दोस्त से मिल लो। आज उसकी हल्दी है। ये बोलकर वो अंदर चली जाती है।।


ये सुनकर श्रेयांश के ऊपर जैसे पहाड़ टूट पड़ा ….



राज :- ओए कहां खोया है चल अंदर चलकर उस वेदांत की खबर लेते है ,, मेरे भाई से प्यार का वादा करके यहां शादी कर रहा है ।। मैं उसे छोड़ूंगा नहीं उसका खून कर दूंगा ।। 


हिमांशु :- संभालो खुद को ,, मुझे लगता है ज़रूर कोई बात है पूरी बात जाने बिना ऐसे किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए।।


श्रेयांश तब तक अंदर जा चुका था और देखता है वेदांत को हल्दी लगाने के लिए ले के आ रहे थे।।

वो सुध बुध गवाएं बस वेदांत की तरफ बढ़ता जा रहा था ।


उधर से एक औरत शगुन की हल्दी का बर्तन लेकर आ रही थी जो श्रेयांश से टकरा जाती है जिससे श्रेयांश गिरने वाला था पर तभी वेदांत उसको पकड़ लेता है 


श्रेयांश वेदांत की बाहों में था और उनके ऊपर पूरी हल्दी गिर जाती है।।।


वहा खड़ी कुछ औरते कहती है ये तो अपशगुण हो गया ।।


तभी एक औरत ज़ोरदार आवाज में बोलती है 


औरत :- कुछ नहीं हुआ है मेरे बेटे की शादी है और वैसे भी हल्दी उसी को लगने वाली थी जो कि लग गई है।।। 


ये वेदांत की मां यानी अनामिका देवी है ।।।


अनामिका देवी :- बेटा तुम ठीक तो हो ना ।।


श्रेयांश उनकी तरफ देख रहा था ये रही औरत थी जो बाहर आई थी।।।


श्रेयांश :- जी मैं ठीक हूं।।


तभी राज और हिमांशु भी अंदर आ जाते है ।।।


राज :- क्या हुआ छोटे तू ठीक तो है ना ।। और हल्दी कैसे लगी तुझे .???


अनामिका देवी :- आप सब वेदांत के दोस्त है ना कोई बात नहीं वैसे भी शगुण की हल्दी लगना शुभ माना जाता है।।


वेदांत उन तीनों को देखकर कुछ समझ ही नहीं पता क्या हो रहा है।।। ये मेरे दोस्त है और मैं ही इन्हे नहीं जानता ।।। और ये मुझे ऐसे क्यों देख रहा जैसे मेरा खून कर देगा।।। वो राज को देखकर सोचता है



श्रेयांश बस वेदांत को देखे जा रहा था और उसके आंखो से आंसू निकल रहे थे।।


राजवर्धन रॉय ( वेदांत के पिता) :- वेदांत बेटा! जाओ अपने दोस्तो को उनका कमरा दिखा दो।।।।


वेदांत :- जी पापा।।।


वो तीनो वेदांत के पीछे पीछे चले जाते है 


कमरे में।।।


वेदांत :- कौन हो तुम तीनों और यहां क्या कर रहे हो??? मैं नहीं जानता तुमलोगो और मेरे दोस्त बनने का नाटक क्यों कर रहे हो??? क्या चाहिए तुम लोगो ???


राज :- देख श्रेयांश ये तो तुझे जानता भी नहीं है और तू इससे प्यार करता है जो प्यार का वादा किसी और से करता है और शादी किसी और से ।।


श्रेयांश का नाम सुनकर वेदांत दंग रह जाता है वो उसके तरफ जाने लगता है लेकिन बीच में राज आ जाता है


राज :- खबरदार जो मेरे भाई को छुआ भी तो ।। 


तभी कोई उन्हें बुलाने आता है


वेदिका ( वेदांत की चचेरी बहन) :- भईया आपको बड़ी मां बुला रही जल्दी चलिए।। 


वेदांत नीचे आता है….. I


अनामिका देवी :- वेदांत बेटा तुमने तो कहा था तुम्हारा कोई दोस्त इस शादी में नहीं आएगा तो ये तीनों कौन है??


वेदांत :- मां वैसे तो मैं किसी को बुलाना नहीं चाहता था पर जब मेरे दोस्त आ ही गए है तो उन्हें शादी में शामिल होने दीजिए।।


अनामिका देवी :- जैसा तुम ठीक समझो।।।


हर्षवर्धन रॉय ( वेदांत के चाचू)। :- वैसे तुम्हारे दोस्त है कहां नीचे नहीं आए।।


शांति देवी ( वेदांत की चाची) :- हां बेटा उन्हें भी बुला लाओ लंबे सफर से आए है थक गए हो गए।।। थोड़ा नाश्ता करके आराम कर लेते ।। कल मेहंदी और संगीत है तो तुम्हारे दोस्त ही महफ़िल जमाएंगे।।


रात को सब अपने कमरे में होते है…


इधर वेदांत चुपके से गेस्ट रूम में आता है और श्रेयांश को देखकर उसके पास जाता है।।।


राज :- अपने कदम वही रोक लो आगे मत बढ़ना।।।


वेदांत :- तुम मुझसे ऐसे बात नहीं कर सकते है और तुम किस बात पर गुस्सा हो रहे है मैं शादी कर रहा हूं इसलिए ।।। मैं तो मिलने आया था पर तुम्हारा भाई ही मुझसे मिलने नहीं आया इस बात पर तो मुझे गुस्सा होना चाहिए ।।। उस दिन नहीं आए तो आज क्या करने आए हो ।। 


श्रेयांश :- मुझे माफ़ कर दो वेदांत मैं उस दिन नहीं आ सका।। मेरी मज़बूरी थी इसलिए नहीं आ सका ।।

पर मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता बहुत प्यार करता हूं तुमसे ।।। 


वेदांत :- अब क्या फायदा इन सब का ।। दो दिन बाद मेरी शादी होने वाली है । अब कुछ नहीं हो सकता।।।


हिमांशु :- पर एक बार हमारी बात तो सून लो कि क्यों नहीं आए थे श्रेयांश भाई आपसे मिलने।।


वेदांत :- आप कौन है???


राज :- ये मेरा बॉयफ्रेंड है मेरा प्यार है।।।


वेदांत :- देखिए जो भी हों अब कुछ नहीं हो सकता है ।। मेने अपने घरवालों को बताया था ,,की मैं किसी से प्यार करता हूं और उसी से शादी करूंगा ।। पर उस दिन तुमने सब बर्बाद कर दिया ।।।


मेरी मां मेरी शादी किसी और से करा रही है उन्हें लगता प्यार व्यार से हमारे परिवार की बदनामी होगी ।। 


हिमांशु :- हम समझ सकते है।।


श्रेयांश :- मुझे माफ़ कर दो ये सब मेरी वजह से हुआ है।। ना उस दिन मेरी बीमारी का पता चलता ना ये सब होता।।


वेदांत :- बीमारी ?? क्या हुआ है तुम्हे???


राज :- इसको कैंसर है ।। इसके पास ज़्यादा समय नहीं है मुश्किल से एक या दो साल है ।।। इसलिए मैंने इसे इसके प्यार से मिलाने की ठानी क्यूकी मै। अपने भाई को आखिरी वक्त में अकेला नहीं देख सकता ।। मैं तुम्हरा आगे हाथ जोड़कर भिख मांगता हूं मेरे भाई को अकेला मत छोड़ो ।। उसे तुम्हारी ज़रूरत है ।।उसके आखिरी वक्त में उसका साथ दे दो ।


Chapter_4



वेदांत :- क्या बोल रहे हो आप , श्रेयांश ये सच है ।।। कुछ तो बोलो


श्रेयांश :- हा! ये सच है।।।


वेदांत :- अब मुझे समझ आया तुम उस दिन मुझसे मिलने इसलिए नहीं आए थे। पर अब कुछ नहीं हो सकता कल मेरी मेंहदी है और दो दिन बाद शादी आप सब ने आने में बहुत देर कर दी … अब चाह कर भी मैं कुछ नहीं कर सकता मैं अपने परिवार के खिलाफ नहीं जा सकता 


श्रेयांश :- रात बहुत हो चुकी है अब हमे सोना चाहिए कल सुबह देखते है क्या करना है।।


सब सोने के लिए चले जाते है…


अगली सुबह….


हिमांशु :- कुछ सोचा आपने की कैसे  क्या करेगे 


राज कुछ बोलने वाला था तभी अनामिका देवी वहा आ जाती है


अनामिका देवी:- आप लोग वेदांत को कैसे जानते हो


श्रेयांश :- जी वो हम दिल्ली में ही मिले थे तब से जानते है 


अनामिका देवी :- अच्छा क्या तुम्हे लगता है कि वेदांत क्या प्यार व्यार का चक्कर है ,,??


श्रेयांश इस सवाल का बस इतना ही जवाब देता है

नहीं आंटी वेदांत बहुत ही शर्मिला इंसान है उसके बहुत ही कम दोस्त है उन्हीं में से एक मैं हूं।।।


अनामिका देवी :- नहीं वो क्या है ना वेदांत पहले शादी के लिए राज़ी नहीं था,पर हमारी परिवार के खुशी के लिए तैयार हो गया।। मैं बहुत गर्व महसूस करती हूं कि मेरा बेटा अपनी जिममेदारी समझता है,,, उसने अपनी खुशी भूल कर हमारी इज्जत का मान रखा।।


राज अपने गुस्से को दबा कर बोलता  है:-  जी बहुत ही मुश्किल होता ऐसा करना वेदांत की दाद देनी चाहिए।।


अनामिका देवी मुस्करा के चली जाती है।।


सब कुछ हो गया मेहंदी का शोर शराबा देर रात तक चलता रहा।।वेदांत के दोस्त और वेदांत ऊपर छत पर शराब पीने में लगे थे ।  


 नशे की हालत में वेदांत को देखकर श्रेयांश के दिमाग में एक आइडिया आता है।।


श्रेयांश उसके करीब जाता है और उसके हाथो से शराब की बोतल अलग करता है और अपने कंधो का साहरा देकर उसे चुप चाप घर के बाहर ले आता है और कार में बिठा कर वहां से दूर ले जाता है।।


रात के तीन बज रहे थे हर तरफ अंधेरा था …. दूर दूर तक खेतों के आलावा कुछ नहीं था वेदांत अब सो चुका था।। श्रेयांश अपनी सीट से लग कर लेट जाता है और अपने सामने सोते हुए वेदांत को देखता रहता है।। वो जब उसकी आंखो पर बिखरे बालों को पिछे करता है… तो खुद को उसके इतने करीब पा कर … एक लम्हे के लिए उसकी सांसे जैसे एक अजीब रफ़्तार में चलने लगती है ...उसकी बंद आंखो में भी एक अजीब सा नशा था...जिसे वह बस निहारता रहता है ...पर वो खुद को रोक नहीं पाता और उसके होंठों के नजदीक जा कर उन्हें चूम लेता है ….


तभी वेदांत अपनी आंखे खोल लेता है और चौक जाता है अपने सामने श्रेयांश को पाकर … वो आस पास देखता है और पूछता है


वेदांत :- ये कहां ले आए हो मुझे … तुम पागल तो नहीं हो गए खोलो दरवाजा अभी..


श्रेयांश कार का लॉक खोल देता है और वेदांत फौरन ही कार से  बाहर निकल जाता और गुस्से में पूछता है 


वेदांत :- चाहते क्या हो यहां लाने का क्या मतलब है में कहीं नहीं जा रहा तुम लोगो के साथ … मेरा भागने का कोई इरादा नहीं है ।।।


श्रेयांश बस उसे देखकर मुस्कुराता रहता है…


वेदांत :- तुम्हें हसी आ रही … हसी  आ रही है मेरी हालत पर तुम्हें पता नहीं है मै किस हालात से गुजर रहा हूं बहुत आसान है ना तुम लोगो के लिए यहां आ कर मुझे यहां से ले जाना …. 


वेदांत श्रेयांश का कॉलर पकड़ कर बोलता है…


तो छह महीने पहले क्यों नहीं आए थे मुझसे मिलने हा… बोलो क्यूं नहीं आए थे तुम…. अगर उस दिन तुम मुझसे मिलने आ जाते तो आज मुझे ये दिन नहीं देखना पड़ता सब तुम्हारी वजह से हो रहा है ना तुम मुझे धोखा देते ना मै इस शादी के लिए हां करता …..


तुम चाहते हो कि मै तुम लोगों के साथ चलू पर मै नहीं कर सकता प्लीज़ वापस लौट जाओ … वरना सब कुछ खत्म हो जाएगा … मैं भी अपनी फैमिली के लिए कुछ करना चाहता हूं… सिर्फ अपने लिए नहीं जीना चाहता हूं..प्लीज़ मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो मैं वक़्त के साथ सब भुला दूंगा।।।।


वेदांत इतना कह कह कर और श्रेयांश की बात सुने बिना ही कार में बैठ कर वापस। घर की ओर चला जाता है…..


....अंधेरा छट चुका था… हर तरफ उजाला फैल रहा था … वेदांत अभी भी अंधेरे में ही था … वह अब भी अपनी ज़िन्दगी को परिवार के लिए दांव पर लगाने में लगा था


श्रेयांश वही खड़ा उसे जाते हुए देखता रहता है … उसे समझ नहीं आता वह उसे कैसे समझाए … वह एक बार उसकी बात मान भी लें और जो वह कर रहा है करने दे … पर बाद में उसने खुद के साथ कुछ कर लिया तो वह शायद श्रेयांश की ज़िन्दगी की सब से बड़ी हार होगी…!!


सुबह से दोपहर हो गई थी … वेदांत हर किसी से खुद को छुपा कर ...अपने रूम में ही बैठा रहता है. उसने कुछ ना खाया और ना पीया … भूख प्यास सब मर चुकी थी… वह खिड़की पे खड़ा बाहर सब मेहमानों को देख रहा था. सब कितना खुश थे … तभी हिमांशु उसके रूम में आता है…. और उससे पूछता है…


हिमांशु :- राज और श्रेयांश कहा है….???


वेदांत :- मुझे पता नहीं।


हिमांशु :- क्या मतलब तुम्हे पता नहीं… कल रात को तुम्हारे साथ ही तो ही गया था और तुम्हारे पीछे राज गया था… मैंने देखा था…


वेदांत :- हा श्रेयांश मेरे साथ गया था … जहां गया था मै। उसे वहीं छोड़ आ गया और राज का मुझे नहीं पता कहा है वो ...

 

हिमांशु :- कल से वो दोनो वापिस नहीं आए है शाम होने को है और उनका कुछ पता नहीं … पर तुम्हे उससे क्या … कोई जिए या मरे … तुम्हे उससे क्या …


हिमांशु की बाते सुन कर एक अजीब सा डर वेदांत के दिल में पैदा हो  गया


..वेदांत रूआंसा सा हो कर बोलता है


वेदांत :- उस दोनों का नंबर पे फोन करके देखा


हिमांशु :- उन दोनों का फोन रूम में ही है… प्लीज़ कुछ कर ढूंढ़ उन्हें कहा है वह… मुझे बहुत डर लग रहा है….






Chapter_5



वेदांत उसकी बात पूरी होते ही उसको साथ लेकर उसी जगह जाता है जहां श्रेयांश को छोड़ कर आया था…. पर वहां कोई नहीं था पूरा दिन निकल चुका था अब उन दोनों को कोई आइडिया नहीं था वह किधर गए होगे… उनके पास कार तो थी नहीं… और वो दोनो घर भी नहीं आएं… आखिर वो गए कहां वेदांत अपने सर परेशान होकर पकड़ लेता है


वेदांत :- अगर अगर उसे कुछ हो गया ना तो मैं खुद को माफ नहीं कर पाउगा … हिमांशु… कहां होगे वह दोनो…


हिमांशु उसे दिलासा देता है


हिमांशु :- चल हम ढूंढते है .. यहां से निकल पहले…


वहां से निकल वह लोग सड़क पर आते है … और सारे दुकान वालो से पूछते है .. उनकी फोटो देखा कर...किसी को कुछ नहीं पता था ..।।


आखिर वह लोग पुलिस स्टेशन जाते है … वेदांत अपनी मां का नाम बताता है….वह एक MLA थी

सो उनके रसूख के चलते पुलिस अपने कम में लग जाती है


पुलिस इंसपेक्टर :- सर आप घर जाइए … आप की कल शादी है…. अनामिका  जी को पता चला के आप सारे काम छोड़ के यहां बैठे है तो हमारी क्लास लग जाएगी….


वेदांत :- नहीं… कुछ नहीं होगा।। आप बस जल्दी से हमारे दोस्तों का पता करे बाकी हम देख लेंगे…


पुलिस इंसपेक्टर :- आप लोगो नजदीक किसी हॉस्पिटल में  पता किया 


हिमांशु :- नहीं  हम बस सड़क पर ही ढूंढते रहे उन्हें… हॉस्पिटल में क्यों ढूंढे...।।


पुलिस इंस्पेक्टर:- सर हॉस्पिटल में उन्हें आप देख लिजिए के कहीं किसी एक्सिडेंट की वजह से तो नहीं गायब है वह दोनों … और आपने ही बताया वह बहुत परेशान थे.. ऐसे में अक्सर हादसा हो जाया करता है … ऐसा करते है मैं आप दोनों के साथ चलता हूं… चलिए...


वह लोग काफी देर तक हॉस्पिटल में देखते है… आखिर में वह लोग एक हॉस्पिटल पहुंचते है जो वेदांत के घर से कुछ दूरी पर था। वहा पता चलता है के सुबह 10 बजे के आस पास एक लाश आई थी … वह एक जवान लड़के कि थी.. जो कि तकरीबन उन लोगो के ही उम्र का था … तलाशी लेने उसके पॉकेट से …. महज एक वॉलेट के अलवा कुछ नहीं निकला और वॉलेट में सिर्फ पैसे थे… और कुछ नहीं।।।


इंस्पेक्टर उन दोनों को डेड बॉडी देखने को कहता है

…यह सुन कर वेदांत की जैसे जान हलक को आ गई ।। वह हिमांशु को बोलता है प्लीज़ तुम जाओ...हिमांशु भी ये सुनकर बहुत डर जाता है… पर देखना जरूरी था… हर जगह उन्हें ढूंढ़ चुके थे… अब यही आखिरी रास्ता था …. वह किसी तरह अंदर जाता है बॉडी की शिनाख्त करने के लिए…..


हर तरफ़ डेड बॉडी थी… जिसे देखकर हिमांशु घबरा जाता है … उसके चलते कदम रुक जाते है … वह पीछे मुड़ कर वेदांत को देखता है … वेदांत भी उसके पास आ जाता है …. वह दोनों आगे बढ़ते है … सामने उनके एक डेड बॉडी पड़ी थी जिसे देखकर हिमांशु … वेदांत का हाथ जोड़ से पकड़ लेता है...वह दोनों एक दूसरे की हिम्मत बढ़ाते है और इंस्पेक्टर उस बॉडी पर से कपड़ा हटाता है...

उसका चेहरा देखने के बाद हिमांशु रोता हुआ घुटने के बल बैठ जाता है … जैसे उसमे कोई जान ही ना हो …. वह डेड बॉडी राज की थी….


वेदांत जाके हिमांशु को गले लगा लेता है…

तभी एक वार्ड बॉय आकर बताता है कि


वार्ड बॉय :- सुबह 9:30 के करीब G.M रोड़ पे एक और एक्सिडेंट हुआ था … जिसकी हालत अभी बेहतर है ...वह भी इसी हॉस्पिटल में लाया गया था… 


वह दोनों यह सुनते ही...वहा से निकल जाते है …. इंक्वायरी काउंटर पर जाकर पता लगाते है..श्रेयांश इसी हॉस्पिटल में है… वेदांत फौरन ही उसको देखने भागता हुआ सीढ़ियों से जाता है.. सामने ही रूम में श्रेयांश बेड पर लेटा हुआ था .. काफी चोट अाई हुई थी उस सर पर और हाथ पर चेहरे पर कई जगह स्टिचेस लगे थे


वेदांत सिर्फ उसे जिंदा देख कर ही खुश था … वह सो रहा था वेदांत उसके करीब जा कार उसका हाथ अपने हाथों में लेकर बोलता   


वेदांत :-आज पहली बार में तुम्हें खोता हुआ पाया है … जैसे बस तुम्हें खो ही दिया था … जान निकाल ली तूने मेरी ...मैं मर जाता अगर तुझे कुछ हो जाता तो … 

वह उसके हाथो को चूमता है 


हिमांशु उन दोनों के देखकर उनके पास जाता है..


हिमांशु :-  ये सब कैसे हुआ श्रेयांश ...राज को किसने इतनी बेरहमी से मारा है किसने उसकी जान ली मुझे बताओ मैं उसे छोड़ूंगा नहीं …


श्रेयांश :- मुझे नहीं पता वो लोग कौन थे.. जैसे ही वेदांत मुझे वहा छोड़ के गया … वैसे ही कुछ लोग आ गए और मुझे मारने लगे उतने में पता नहीं कहां से राज भाई आए और उनसे लड़ने लगे …


उन लोगो ने राज भाई को बहुत मारा मुझे भी मारा …

मैं बेहोश हों गया था उसके बाद क्या हुआ मुझे कुछ याद नहीं मैं कैसे यहां आया वो भी मुझे नहीं पता .. हिमांशु भाई मुझे माफ़ कर दो मै राज भाई की मदद नहीं कर सका ..


हिमांशु :- हमारी तो किसी के साथ कोई दुस्मनी भी नहीं है तो ऐसे कोई कैसे किसी पर हमला कर सकता है .. ज़रूर कुछ बात है हमे पुलिस में कंप्लेन करनी चाहिए…


तीनों राज का अंतिम संस्कार करके और पुलिस में रिपो्ट लिखा कर वापस घर आते है…


घर पर सब लोग चिंतित थे क्यों कि घर में शादी है और दूल्हा पूरे दिन घर से गायब था..


जब तीनों घर पहुंचते तब


अनामिका देवी :- कहा थे सुबह से वेदांत … कल तुम्हारी शादी है और तुम सुबह से गायब हो घर में सब कितने परेशान है और तुम्हारा फोन भी बंद आ रहा था …हम सब को तुम्हारी फ़िक्र हो रही थी।।


वेदांत :- मां वो श्रेयांश और राज पर किसी ने हमला किया था और राज की मौत हो गई है हम सब उसकी अंतिम संस्कार करके और पुलिस में रिपो्ट लिखा के आ रहे है…


ये सुनकर सब चौक जाते है 


राजवर्धन रॉय श्रेयांश से पूछते है 


राजवर्धन रॉय :- बेटा यह सब कैसे हुआ कौन थे वह लोग आप सब ठीक तो है…


वेदांत :- पापा ...इसे बहुत चोटे अाई है तो ऊपर रूम में आराम करने के लिए ले जा रहा हूं। .. और उसने पुलिस को सब बता दिया है पुलिस जांच कर रही है


शादी में आए हुए मेहमान बाते करने लगते है कि…


पहले हल्दी का गिरना और अब दूल्हे के दोस्त का इस तरह मरना … इस शादी में तो बहुत ही अपशगुन हो रहे है ऐसे में कल शादी कैसे होगी???


अनामिका देवी … वेदांत से कहती है…


अनामिका देवी :- वेदांत बेटा तुम भी जा के आराम कर लो कल तुम्हारी शादी है और शादी में दूल्हा थका हुआ दिखे अच्छा नहीं लगता ..


वेदांत कुछ बोले बिना वहां से चला जाता है 


हिमांशु … श्रेयांश को देखने उसके कमरे जाता है तो देखता है कि वह सो रहा था और वेदांत अभी भी उसका हाथ पकड़े हुए था


हिमांशु :- तुम भी अजीब हो .. उससे इतना प्यार करते हो की जान निकल जाया करती है तेरी ...उसके बावजूद तू ये शादी कर रह रहे … उसके बिना रहने कि सोच रहे हो … ये शादी करने तुम कभी खुश नहीं रहोगे … जीते जी मर जाओगे तुम….


वेदांत :- नहीं मैं नहीं रह सकता श्रेयांश के बिना ऐसी ज़िन्दगी जीने से क्या फायदा जब में रह रोज मरता रहूंगा…. आज मैंने उस एहसास को महसूस कर लिया है जो शायद कुछ वक़्त बाद … श्रेयांश को खो देने पर करता… शायद तुम भी अभी वैसा ही महसूस कर रहे होगे … 

जिससे तुम इतना प्यार करते हो उसके जाने के बाद तुमने जिस तरह अपने आप को संभाला हैं तुम्हारी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी…


हिमांशु :- मुझे तो अब आदत हो गई है… लगता है भगवान ने मेरी किस्मत में खुशियां लिखी ही नहीं है जिससे मैं इस दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करता हूं उसे मुझसे दूर कर देते है …

पहले पापा फिर मां और अब राज को भी मुझसे दूर कर दिया पता नहीं ऊपर वाले ने मेरी किस्मत में आखिर क्या लिखा है…


वेदांत :- हौसला रखो ...सब ठीक होगा …मैं भी समझ गया हूं कि जिससे हम प्यार करते है उसके बिना हम नहीं रह सकते है इसलिए मैं भी तुम लोगो के साथ चलूंगा… हम कल ही निकलेंगे शाम को सब बारात के लिए तैयार हो रहे होगे उसी दरमिया मैं भी पालर के लिए निकलूंगा और हम वही से निकल जाएंगे...


हिमांशु :- गुड मैं फ्लाईट की बुकिंग करता हूं…


वेदांत बस श्रेयांश को देखे जा रहा था और आने वाले कल के बारे में सोच रहा था … के कितनी खुशियां हम दोनों का इंतज़ार कर रही… अब हम दोनों का इंतजार खत्म.. अब खुशियों को हमारा इंतेज़ार है… वह उसके सर पर हाथ फेरते हुए उसके होठों को चूमता है … और कहता है…. जल्दी ठीक हो जा… कल से हम साथ होगे…..।।।।


Chapter_6



सुबह की पहली किरण जब वेदांत की बंद आंखों पर पड़ती है देखता है कि वह श्रेयांश को पकड़े - पकड़े ही सो गया था … उसकी नींद खुल जाती है … वह उठ कर खिड़की के पास जाता है और खिड़की के बाहर का नज़ारा बेहद खूबसरत लग रहा था … जैसे हर तरफ फैलता उजाला हर चीज को एक अलग ही रंग दे रहा था… तभी श्रेयांश बेड पर ही लेटे- लेटे उससे बोलता है


श्रेयांश :-  हमारी ज़िन्दगी की यह नई सुबह है … और शायद कल के बाद से हर सुबह इतनी ही खूबसरत हुआ करेगी… जब हर सुबह में तुमको अपने बाहों के करीब पाउगा।।।।


वेदांत उसकी बात सुन कर मुस्करा देता है


वेदांत :- वह तो तब ही होगा जब तुम पूरी तरह से ठीक हो जाओगे और उसके लिए तुम्हे आराम करने की जरूरत है … इसलिए तुम आराम करो … जब से जागे हो तो बोले जा रहे हो … तुम्हारी स्तिचेस पर असर पड़ेगा….


 श्रेयांश :- इतने वक़्त बाद तुम्हारा साथ मिला है मैं चुप कैसे रह सकता हूं… 


श्रेयांश अपने बेड से थोड़ा उठता है बैठने के लिए… और वेदांत उसे सहारा देता है…


श्रेयांश उसे किस😘😘 करते हुए अपने फोन में सेल्फी ले लेता है…


वेदांत :- ये सेल्फी किस लिए ???


श्रेयांश :- अब हम रोज इसी तरह सेल्फी लेगे … श्रेयांश थोड़ा उदास😔😔 होते हुए मेरे जाने के बाद तुम उन सेल्फी को देख मुझे याद करना…


वेदांत :- प्लीज़ ऐसा मत बोलो जितना भी वक्त बचा है हमारे पास मैं तुम्हे दुनिया कि सारी खुशियां देना चाहता हूं...😘😘😘


" बिन बोले ही मेरी ज़रूरत भी समझने लगे हो तुम 

जैसे तुम बिना मेरे कुछ कहे मुझसे बेहतर मुझे समझने लगे हो तुम…."


दिन गुजरने को था मेहमान आने लगे थे … हर तरफ सब तैयार हो रहे थे … वेदांत भी उठ कर पालर जाने के लिए तैयार हो चुका था… और बार बार बस घड़ी देख रहा था… तभी उसके दोस्त पकड़ लेते है… क्यों भाई बहुत जल्दी है तुझे बारात ले जाने की… वह बस हंस के उन लोगो को बाते टाल देता है… 


वेदांत अपने दोस्तो कहता है :- तुम लोग क्या यह सिर्फ खाना खाने आए हो कितने सारे काम पड़े हुए है जाके उन कामों में सबकी मदद करो…


वो लोग जाते है थी वेदांत,, हिमांशु को कॉल करता है


वेदांत :- हा बोल हिमांशु,,, मैंने अभी देखे तेरे मिस्ड कॉल्स

उधर से आवाज नहीं आती … शायद  DJ के साउंड की वजह आवाज सही नहीं आ रही थी…


वो कॉल कट कर करके ऊपर छत पर जाता है...

और फिर कॉल करता है… और उधर से फोन तुरंत ही उठ जाता है

हिमांशु :- वेदांत…. वेदांत…. … श्रेयांश यहां नहीं है कब से तुझे बताने के लिए नंबर मिला रहा था।।।


वेदांत:- क्या मतलब नहीं है… वही होगा यार या फिर बाहर होगा …


हिमांशु :- नहीं है मैं देख चुका हूं… कुछ समझ नहीं आ रहा है… कहा जा सकता है…

 

वेदांत :- रुक मैं आता हूं … उधर..


हिमांशु :- नहीं तू मत आ… अभी तू आयगा तो प्रॉब्लम हो जाएगी… मैं देखता हूं…


वेदांत :- अरे मैं कैसे नहीं आऊ यार मेरा सारा ध्यान वही रहेगा …


हिमांशु :- तू फिलहाल पालर जा नहीं तो किसी को शक हो जाएगा मैं देखता हूं श्रेयांश कहां हैं…


वेदांत :- ठीक है मुझे फोन करके अपडेट करते रहना


इधर वेदांत के बंगले  के पिछे वाले हिस्से के पास दो कार आकर रुकती है… और उसमे से कुछ लोग निकलते है जो कि गुंडे जैसे दिख रहे थे  … जिन्हें वेदिका देखे लेती है…


वह देखती है कि वह गुंडे जैसे दिखने वाले लोग कार से  निकलते ही इधर उधर देखने लगते है… तभी वह लोग वेदिका की ओर देखते  … तभी वेदिका को पीछे की ओर खींच लेता है जिससे वह लोग वेदिका को नहीं देख पाते है…वेदिका पीछे मुड़ के देखती है कि उसे किसने खींचा है … वह और कोई नहीं बल्कि हिमांशु था… 


वेदिका :- आप यहां कैसे  .. आप उन लोगो को जानते है क्या. ???


हिमांशु :- मैं नहीं जानता उन्हें ।। मैं तो यहां श्रेयांश को खोजने आया था… 


वेदिका :- यहां हो क्या रहा है…?? आपको लगता है श्रेयांश को इन लोगो ने किडनैप किया है।। पर क्यों…??


हिमांशु :- मैं तुम्हे सब सच बताता हूं… उसके बाद तुम्हे जो ठीक लगे वो करना मैं तुम्हे रोकूंगा नहीं…


फिर हिमांशु वेदिका को सब बता देता है वो लोग यहां क्यों आए है श्रेयांश और वेदांत के प्यार के बारे में भी बता देता है…


अब तुम्हरा क्या फैसला है मेरी मदद करने का या अंदर जाके सबको बताने का।।।


वेदिका:- मैं उसी दिन आप लोगो की बाते सुन ली थी … पर मुझे यह नहीं पता था कि वेदांत भाई भी श्रेयांश से प्यार करते है मैं आप सब की मदद करुगी…


हिमांशु ( खुश होते हुए ):- शुक्रिया वेदिका हमें समझने के लिए अब ।।।


वह लोग देखते है कि वह गुंडे जैसे दिखने वाले लोग अभी भी खड़े थे पर फिर उस स्टोर नुमा कमरे के अंदर चले जाते है...


  वह दोनों भी उस कमरे की तरफ छिपते छिपते जाते है… जहा किसी की चिल्लाने कि आवाजे आ रही थी


हिमांशु और वेदिका भाग कर उस आवाज की तरफ जाते है और दरवाजा खोलते है वह जो देखते है उससे हिमांशु का गुस्सा सातवे आसमान पर पहुंच जाता है … वह गुंडे लोग श्रेयांश को बहुत ही बुरी तरह पिट रहे थे… इतनी बुरी तरह की श्रेयांश से खड़ा भी नहीं हुआ का रहा था … हिमांशु उस गुंडे को धक्का दे कर दीवार से भिड़ा देता है … और उसपर टूट पड़ता है … जैसे वह उसे जान से ही मार देगा… इधर वेदिका श्रेयांश को संभालती है … हिमांशु उन सभी गुंडों को मार मार के अधमरा कर देता है…


तभी एक गुंडा पिस्तौल निकाल कर श्रेयांश की तरह तानता है और गोली चला देता है … जिसे वेदिका देख लेती है और श्रेयांश के सामने आ जाती है जिससे गोली वेदिका को लग जाती है…


यह देखकर वो गुंडे लोग वहा से भाग जाते है...हिमांशु उनका पीछा करता है…


इधर वेदिका को गोली लग गई थी… उसके शरीर से बहुत सारा खून बह चुका था…


श्रेयांश उसके पास आता है


श्रेयांश :- वेदिका ये तुमने क्या किया … अब मैं वेदांत को क्या कहूंगा की मेरी वजह से उसकी बहन की जान चली गई


वेदिका :- हिमांशु ने मुझे सब कुछ बता दिया है… शायद मेरी ज़िन्दगी का यही मकसद था तुम दोनों को  मिलाना … मुझसे वादा करो तुम  भाई को हमेशा खुश रखोगे… आज के बाद उनका बहुत कुछ खोने वाला है … इसलिए उनका साथ मत छोड़ना … जब तक जिओगे भाई के साथ रहना और एक  वादा यहां से जाने के बाद भाई से कहना कि वो एक लड़की को गोद ले और उसका नाम भी वेदिका रखे जिससे मैं उनके साथ हमेशा रहूंगी… वादा करो मुझसे श्रेयांश…


श्रेयांश :- मैं वादा करता हूं… वेदांत को कभी नहीं छोड़ूंगा...और पहले बेटी एडॉप्ट करेगे उसका नाम वेदिका रखेगे…


इतना सुनते ही वेदिका की सांसे रुक जाती है...😔😔😔


श्रेयांश रोता हुआ वेदिका से लिपट जाता है….


इधर वो गुंडे फोन पर किसी को इन सब के बारे में बता रहा था तभी हिमांशु आकर उससे फोन लेकर सुनता है कि आखिर ये कौन है जो हमारे पीछे हाथ धोकर पड़ा है

फोन पे सामने से जिसकी आवाज आती है उसे सुनकर हिमांशु के होश उड़ जाते है।।। उधर से आवाज आती है 


फोन पर किसी कि बोलने की आवाज :- बेवकूफों ये क्या किया तुम लोगो को गोली चलाने भी नहीं आती है क्या… आखिर किस बात के इतने पैसे लेते हो जब कोई काम ढंग से नहीं नहीं करते…. दुबारा तुम लोगो पर भरोसा करके मैंने गलती कर दी…. पहले उस राज को मार दिया वैसे उस राज को भी मरना ही चाहिए ऐसे लोगो को ज़िंदा रहने का कोई हक नहीं है…. मारना ही था तो उस हिमांशु को मार देते वो भी तो वही गंदगी है … वेदिका को क्यों मारा …. अब मार ही दिया है तो लाश को ठिकाने लगा देना और इन सब में मेरा नाम नहीं आना चाहिए नहीं तो तुम लोगो की ख़ैर नहीं समझे…।।


हिमांशु( आवाज बदल के):- आगे का क्या प्लान है बॉस…


फोन वाला शख्स:- आगे बहुत ही बड़ा धमाका होने वाले है...😈😈😈 उस श्रेयांश को क्या लगता है वो मेरे नाक के नीचे से वेदांत को ले जाएगा और मैं हाथ पर हाथ रखे देखती रहूंगी…. इस बार मैं कुछ ऐसा करूंगी की श्रेयांश हर रोज हजार मौत मरेगा...😈😈 इस मेरा निशाना वेदांत होगा….😈😈😈

और दुबारा मुझे फोन मत करना … मुझे तुमसे कुछ काम होगा तो सामने से फोन करूंगी।।।


यह सब सुन कर हिमांशु के पैरों तले जमीन खिसक गई थी…वह फोन के कॉल लिस्ट चेक करता है यह फोन कॉल किसी बॉस नाम के व्यक्ति को की गई थी।।।


हिमांशु :- इसका मतलब वेदांत की जान खतरे में है और उसकी जान लेने वाला और कोई नहीं उसका अपना है …. मुझे वेदांत को बचाना होगा … लेकिन सबसे पहले मुझे ये सारी बात श्रेयांश को बतानी होगी...


वह गुंडे तब तक वहा से भाग गए थे….।।।


हिमांशु ,,, श्रेयांश के पास जाता है और देखता है कि श्रेयांश बेहोश पड़ा है वहा वेदिका की लाश भी कहीं नहीं दिख रही थी।।।

वह श्रेयांश को होश में लाने की कोशिश करता है…


हिमांशु :- क्या हुआ तुम बेहोश कैसे हुए और वेदिका की लाश कहा है….???


श्रेयांश :- मेरे सर किसी ने जोर से वार किया जिससे मैं बेहोश हो गया उसके बाद क्या हुआ मुझे नहीं पता...।।


हिमांशु :- मुझे सब पता चल गया है … इन  सब के पिछे  कौन कर रहा है… 

फिर वह श्रेयांश को सब बता देता है जिसे सून कर उसके भी होश उड़ जाते है…


श्रेयांश :- क्या तुम सच कह रहे हो…


हिमांशु :- हा यह सच है… अगर हमें उसे सजा दिलवाने के लिए ठोस सबूत की ज़रूरत होगी ..  बिना सबूत के हम उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते है… फिल हाल मैं वेदांत को बचाने जाना है…


श्रेयांश :- मैं भी चलता हूं आपके साथ...।।


हिमांशु :- नहीं तुम यहीं इंतेज़ार करो … मैं वेदांत को यही आने को कह दूंगा।।। श्रेयांश मुझसे एक वादा करो अगर मुझे कुछ हो गया तो तुम अपने भाई के कातिल को सजा ज़रूर दिलवाना...।।।


श्रेयांश :- मैं उस इंसान को नहीं छोड़ूंगा … उसने एक नहीं बल्कि दो जाने ली है उसे तो सजा होकर रहेगी … पर आप ऐसा क्यों कह रहे है कि आपको कुछ हो गया तो … आप मुझसे वादा करो कि आप सही सलामत वेदांत को लेकर मेरे पास आओगे।।।


हिमांशु :- ठीक है मैं वादा करता हूं …( यह वादा हिमांशु ने अपने उंगलियों को क्रॉस करके की थी))..,..।।




Chapter_7


इधर वेदांत को पालर से घर आना पड़ता है क्यों कि उसके पास और कोई चारा ही नहीं था ...।।।

वेदांत अपने कमरे में था और सोच रहा था कहां हो तुम दोनों अब तक आए क्यों नहीं कुछ वक्त में बारात निकलने के है .. ।। प्लीज़ जल्दी आ जाओ वरना मजबूरन मुझे यह शादी करनी होगी…


उसका मन तो नहीं करता है लेकिन वह फिर भी शेरवानी उठा के पहनता है.. उसके दरवाजे पर कोई दस्तक करता है… वह जल्दी से दरवाजा खोलता है… और हिमांशु उसके मुंह पर हाथ कर देता है जिसे वह कुछ बोला ना पाए और अंदर आता है.. उसे देखकर वेदांत गले लगा लेता है..


वेदांत :- कहां थे तुम … ?? मैं कब से तुम्हारे कॉल का इंतज़ार कर कर रहा था… थोड़ा और लेट आते तो मेरी शादी हो जाती..।।


हिमांशु :- ये वक़्त इन सब बातो का नहीं है तू जल्दी से ये शेरवानी उतार और मुझे दे… तेरी जान को खतरा है…।।।


वेदांत :- क्या मतलब तुझे दूं…. और मेरी जान को किससे खतरा है..


हिमांशु :- बाते मत कर वरना बहुत देर हो जायेगी वह ज़बरदस्ती वेदांत की शेरवानी उतारता है … मैंने श्रेयांश को सब बता दिया है वह तुझे समझा देगा.. ये ले बैग इसमें हमारे फ्लाईट की टिकटें है… 1 घंटे में फ्लाईट है… उतनी देर में तू निकल जाएगा…


वेदांत :- यह क्या कर रहा है तू .. क्यों पहन रहा है इसे…


हिमांशु :- क्यों कि तेरी जान को खतरा वह वो तुझे मार देगे और श्रेयांश को भी नहीं छोड़ेगे…मैंने पास और कोई रास्ता नहीं है तुम दोनों को बचाने का …. मेरे प्यार को तो मंजिल ना मिली पर तुम दोनों के प्यार को एक करना चाहता हूं..।


वेदांत :- पर तेरा क्या…


हिमांशु :- मेरी फिक्र मत कर … जो होगा देख लूंगा मै… पर तू अभी जा बहुत देर हो गई है… और देर मत कर प्लीज़  .. वह वेदांत के हाथ जोड़कर कर उससे रिक्वेस्ट करता है


वेदांत :- नहीं मैं ऐसे छोड़ के नहीं जा सकता तू भी चल…


हिमांशु :- अगर वह उपर आए और तू ना मिला तो वह लोग पूरे शहर में हम लोगो को ढूंढते फिरे गए और मिलते ही हम में से कोई नहीं बचेगा… मैंने अपनी ज़िन्दगी बहुत जी ली यार .. अब और नी जिया जाता … जितना जिया बहुत था … अब राज के बिना नहीं जीना...


वेदांत उसकी हर बात को इंकार करता रहता है


वेदांत :- ऐसा मत बोल मै नहीं छोड़ के जाने वाला


हिमांशु :- इसके आलवा कोई रास्ता नहीं है…. अगर तू अपनी और श्रेयांश की जान बचाना चाहता है और उसके साथ अपनी ज़िन्दगी बिताना चाहता है तो…. मुझे तुम लोगो के लिए खुर्बान होने में कोई दुख तक़लीफ नहीं होगी… मैं तो खुश हूंगा के मैं अपनी कहानी पूरी ना कर सका पर तुम दोनों को कहानी को पूरा कर के जाऊंगा… यहां जो कुछ होगा मैं देख लूंगा तू जा ...।।


वह ज़बरस्ती उसे खिड़की के पास ले जाता है…


हिमांशु :- यह देख यह खिड़की से नीचे उतर जा..


वेदांत उसे गले लगा लेता है…


वेदांत :- मैं तुझे कुछ नहीं होने दूंगा … श्रेयांश को लेकर मैं तेरे पास ही आ रहा हूं…


हिमांशु :- हां ठीक है आ जाना


पर हिमांशु की आवाज कांपती हुई महसूस होती है… जिसे सून कर वेदांत जाना ही नहीं चाह रहा था…


हिमांशु :- मैं जानता हूं वेदांत तू वापिस ज़रूर आएगा कुछ बुरा नहीं होने देगा मेरे साथ पर  .. वापिस मत आना वरना मेरा किया हुआ सब कुछ बर्बाद हो जाएगा… मैं तुम दोनों को खुश देखना चाहता हूं… मेरी एक बात मानना श्रेयांश जो भी तुझसे कहेगा उसकी बातो पर भरोसा करना .. मेरी आखिरी ख्वाहिश है कि तुम दोनों एक साथ अपनी ज़िन्दगी बिताओ… मेरी इस ख्वाहिश को पूरा ज़रूर करना इसे अधूरा मत छोड़ना...।।


वेदांत खिड़की से निकल चुका था वह दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए थे … हिमांशु बोलता है


हिमांशु :- श्रेयांश का ख्याल रखना .. जाओ अब कोई दरवाजे पर  हैं..


...वेदांत पाईप के सहारे नीचे उतर जाता है और आगे सड़क कि ओर जा रहा होता है तभी उसे चीखने चिल्लाने की आवाजें आती है ….. वह मुड़ के देखता है तो….उसके कमरे से आग की लपटों से घिरा …. हिमांशु खिड़की से नीचे गिरता है… वेदांत उसकी ओर भागता है … लेकिन उसे हिमांशु की बात याद आती है मेरी आखिरी ख्वाहिश को अधूरा मत छोड़ना…

वह ना चाहते हुए भी….उससे दूर सड़क के उन अंधेरों में अपनी ज़िन्दगी की तलाश में निकल जाता है...।


हिमांशु का शरीर पूरी तरह से जल गया था…. सबको यह लग रहा था कि वह वेदांत का शरीर है… इसलिए सब वेदांत … वेदांत चिल्ला रहे थे… 

किसी को यह समझ नहीं आ रहा था कि आग कैसे लगी है…


अनामिका देवी ( रोते हुए) :- यह क्या हो गया …. देखिए ना जी हमारा बेटा हमे छोड़ के चला गया है  …


राजवर्धन रॉय:- अचानक से यह आग कैसे लगी …


हर्षवर्धन रॉय :- भाई साहब लगता है शॉट सर्किट की वजह से आग लगी होगी...।।


शांति देवी :- इतना सब हो गया है पर पता नहीं ये वेदिका कहा है कहीं दिखाई ही नहीं दे रही है…??


सब कोई इस हादसे से सदमे में आ गए थे...।।


इधर वेदांत ,,, श्रेयांश के पास आता है..


श्रेयांश :- कहा थे कितनी देर लगा दी आने मैं… हिमांशु भाई कहा है… बोलो वेदांत मुझे बहुत डर लग रहा है क्या हुआ है???


वेदांत :- वह हि… हिमा…. हिमांशु नहीं रहा  .. मैंने अपनी आंखो के सामने उसे जलता हुआ छोड़ के आ गया...।। वह कह रहा था कि हमारी जान को खतरा है… कोई हम दोनों को मरना चाहता हैं  … आखिर कौन है जो हमारा दुश्मन है … उसने तुम्हे सब बताया है… प्लीज़ मुझे बताओ कौन हम दोनों को मरना चाहता है...।।


श्रेयांश अपने आप को संभालता है और कहता है


श्रेयांश :- तुम्हे सच जानना है ना तो मैं जैसा कहता हूं वैसा करो… 


वेदांत :- ठीक है मैं ऐसा ही करता हूं..


वेदांत के घर पर सिर्फ अनमिका देवी अकेली थी … मेहमान सब जा चुके थे घर के बाकी लोग श्मशान गए थे और शांति और हर्षवर्धन अपनी बेटी को खोजने गए थे….।।।


तभी श्रेयांश अंदर तालियां बजाते हुए आता है...।।


अनामिका देवी :- तुम …. तुम यहां क्या कर रहे हो मुझे लगा तुम चले गए हो … रोते हुए उसके पास आती है तुम्हारा दोस्त हम सब को छोड़ के इस दुनिया से चला गया है...।।


श्रेयांश :- मेरे सामने यह नाटक ना ही करो आप तो अच्छा होगा मैंने आपका असली चेहरा देख लिया है… आप तो मां कहलाने के लायक नहीं है…अपने ही बेटे को मार दिया …. क्यों… क्यों कि वह एक लड़के से प्यार करता था .. आपने मुझसे मेरी जीने कि वजह छीन ली...।।


अनामिका देवी :- क्या बोल रहे हो बेटा …. भला मैं अपने ही बेटे को क्यों मारूंगी ..।।


श्रेयांश :- तुमने सिर्फ वेदांत को है नहीं मेरे भाई और अपनी भतीजी वेदिका को भी मारा है… अरे डायन भी सात घर छोड़ कर नज़र डालती हैं… पर तुमने तो अपने ही घर को नहीं छोड़ा...।। मुझे सब पता चल गया है अब अपना यह नाटक बंद करो…. दूसरों को बेवकूफ बना सकते हो मुझे नहीं...।।


Last_chapter


अनामिका देवी( हंसते हुए) :- पता चल गया …. सब पता चल गया 😈😈😈 … हा मैंने है सब किया … मैं तो तुझे मारना चाहती थी… पर तेरी किस्मत ने हर बार तुझे बचा लिया … मेरे उन भाड़े के गुंडों से… पहले तेरे भाई राज ने बीच में आकर अपनी जान गंवाई फिर मेरी प्यारी भतीजी ने तुझे बचाने चक्कर में अपनी जान से हाथ धो बैठी…. बेचारी बिन मतलब के मारी गई…. तुझे पता है मैंने तेरे वेदांत को कैसे मारा😈😈😈 …. उसके कमरे में मैंने है शॉट सर्किट करवाया जिससे उसके कमरे में आग लग गई😈😈😈।।


श्रेयांश :- आखिर आप ऐसा कैसे कर सकती है …अपने ही बच्चो को कैसे मार सकती है  .. मुझे क्यों मारना चाहती है आप  .. मैंने आपका क्या बिगाड़ा है ..,.,.।


अनामिका देवी :- तू मुझसे ये पूछ रहा है की में तुझे क्यों मारना चाहती हूं...तू क्या है मैं अच्छे से जानती हूं … तू गे (Gay) है… गंदगी है तू और मेरे बेटे को भी अपने जैसा बना दिया तूने … मैंने क्या कुछ नहीं किया कि वह तुझसे दूर रहे उसकी शादी भी करवाने वाली थी पर नहीं वो तेरे साथ भागना चाह रहा था … इसलिए मैंने उसे मार दिया ..आखिर कोई अनामिका देवी का नाम डुबाता रहे और मैं हाथ पर हाथ रख कर देखती रहती है...।।इस शहर में मेरा एक नाम है रुतबा है… बहुत जल्द ही मुझे मंत्री पद मिलने वाला है और मेरा  रुतबा और बढ़ने वाला है ...मैं नहीं चाहती तुम जैसे लोगो की वजह से मेरा नाम मिट्टी में मिले ...इसलिए मुझे जो ठीक लगा मैंने किया….( हंसते हुए) वैसे भी तू मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता  … तेरे पास कोई सबूत नहीं है😈😈😈


श्रेयांश :- सबूत  .. इंस्पेक्टर सर मिल गया आपको सबूत … इन्होंने ने खुद अपने मुंह से अपना जुर्म कबूला है...।।


तभी सभी लोग और पुलिस अंदर आते है...।।


अनामिका सब को देख कर चौक जाती है ….खास कर वेदांत को देख कर...


अनामिका देवी :- वेदांत तू ज़िंदा है … कैसे …???वह लाश… वह लाश किसकी थी...।


वेदांत :- आपने तो मुझे मारने का पूरा इंतजाम कर लिया था मां … पर शायद उपर वाले को आपकी सच्चाई मुझे दिखानी थी इसलिए मुझे ज़िंदा रखा … ।।


शांति देवी (रोते हुए):- जिजी वेदिका मुझसे ज़्यादा आपको मानती थी…. मेरी एक भी बात नहीं सूनती थी पर आपकी सारी बाते सुनती थी आपने उसे भी मरवा दिया क्यों जिजी क्यों….?? उसने आपका क्या बिगाड़ा था??


राजवर्धन रॉय सामने आते है और अनामिका थप्पड़ को मारते हुए :- सत्ता के लालच में अंधी हो गई हो तुम … तुम्हें  अपने बेटे की खुशियों से ज़्यादा अपनी कुर्सी की पड़ी थी…. तुमने एक नही तीन - तीन लोगों की जान ली है… तुम जानना चाहती हो ना वो लाश किसकी थी …. वह हिमांशु की लाश थी …. वेदांत से उसका कोई रिश्ता ना होने के बावजूद उसने इसकी जान बचाई और इसकी सगी मां हो कर इसकी जान लेने चली थी.. अब जेल में सड़ती रहना….. ले जाइए इंस्पेक्टर...।।


अनामिका देवी :- मैंने यह सब अपने लिया नहीं किया आपके परिवार के लिए हमारे परिवार के लिए किया …. आपने सोचा है कभी सोचा वेदांत अगर इस लड़के के साथ भाग जाता तो क्या इज्ज़त रह जाती हमारी समाज में... तू मुझे गिरफ़्तार करेगा … जो मेरे आगे पीछे कुत्ते कि तरह दुम हिलाता रहता था….(इंस्पेक्टर की तरफ़ देख के)


इंस्पेक्टर:- तब आप इस शहर की एक सम्मानित महिला थी एक MLA थी पर आज आप एक मुजरिम है और मुजरिम की जगह जेल में होती है…,...।।


इंस्पेक्टर महिला कांस्टेबल से … गिरफ़्तार कर लो इसे...।।


अनामिका देवी :- तुम लोग मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते हो...।।


हर्षवर्धन रॉय :- तुम्हारे खिलाफ में गवाही दूंगा अदालत में….।।। फिर श्रेयांश के पास आते है … मुझे माफ़ कर दो बेटा मेरी पत्नी ने जो किया है उसे उसकी सजा ज़रूर मिलेगी...फिर वह वेदांत के पास आते है … बचपन में तू मुझसे कोई बात नहीं छिपाता था हर बात मुझे आकर बताता था और आज अपने बारे में इतनी बड़ी बात छुपा ली...।। क्या सोचा तेरे पापा तुझे नहीं समझेंगे … अरे एक बार बात  करके देखता … मैं अक्सर बिज़नेस ट्रिप पर विदेशों में गया हूं … वहां कई लोगो से मिला हूं …. जो समलैगिंक है…. मैं समझता हूं बेटा इसमें तेरी कोई गलती नहीं है ना ही किसी और कि गलती है बस तेरी फीलिंग्स दूसरों से अलग है …. इससे हमारे बीच में कोई बदलाव नहीं आएगा तू पहले भी मेरा बेटा था और आज भी मेरा बेटा है… ।।


वेदांत :- पापा मुझे माफ़ कर दीजिए मैं आपको समझ ही नहीं सका।।


पुलिस अनामिका को वहा से ले जाती है….।।।


पांच साल बाद….. मुंबई में…


चलो यहां से बारिश होने वाली है….चलो… बीच (समंदर किनारे) घूम रहे लोग बारिश आने के डर से जा रहे होते है….हवा बहुत ही तेज थी और बादल और भी घने… पर वेदांत अब भी वही खड़ा था…. दूर से आती लहरों को देखता एक गहरी सोच में डूबा हुआ था …


तभी श्रेयांश पिछे से आकर उसके कंधो पर हाथ रखता है….


श्रेयांश :- क्या देख रहे हो …. उन्हें याद कर रहे हो….


 वेदांत :- ह्म्म …. याद तो हमेशा ही करता हूं… पागल था वो एक दम


श्रेयांश :- इश्क़ करने वाले पागल ही होते है … जैसे तुम और मैं  … जैसे राज और हिमांशु….उसने हमारी कहानी को पूरा करने के लिए …. इतनी बड़ी कुर्बानी दि….



वेदांत :- नम आंखों से …. उन लहरों को देखता रहता है…. भुलाई नहीं भूलता वह मंज़र जब वह उन लपटों में घिरा हुआ था...


श्रेयांश उसकी अपनी बाहों में भरते हुए:- मत याद करो यह सब…. उसने हमारी खुशियों के लिए यह किया था… अब उसका नाम ले कर तुम उदास रहेंगे तो उसकी कुर्बानी जाया होगी… वह दोनों हमेशा के लिए एक हो गए...वह उसके गालों को चूमता है….


वेदांत भी उसकी बाहों को पकड़ के गहरी सांस लेता है….तभी बारिश की तेज बोछार शुरू हो जाती है….


पीछे से वेदांत को कोई आवाज लगा रहा था…. जिससे उसका ध्यान टूटता है.. वह देखता है कि श्रेयांश यहां नहीं है … वह फिर से सपना देख रहा था …. जब से श्रेयांश की मौत हुई है तब से वेदांत बहुत अकेला हो गया था… तभी उसी एक आवाज आती है..


पापा जल्दी चलो बारिश बहुत तेज हो रही है… देखो हम तीनों पूरी तरह भींग गए है…. आप भी पूरी तरह से भींग गए हो… जल्दी चलो घर नहीं तो आपको ज़ुकाम हो जाएगा …


वेदांत :- चलते है मेरी मां…. कितना बोलती हो… और वो दोनो शैतान कहां है….


बच्ची:- वह दोनों तो कार में कबके बैठ गए है…


यह बच्ची और कोई नहीं वेदिका थी… जैसा कि हिमांशु ने वेदिका से वादा किया था उसी वादे को पूरा किया… और जो दो शैतानों की बात हो रही है वह है राज और हिमांशु …. वेदांत और श्रेयांश ने दो बेटों को भी एडॉप्ट किया है जिनका नाम उन्होंने राज और हिमांशु के नाम पर रखा है…


कार में…


हिमांशु :- पापा आप फिर से श्रेयांश पापा की यादों में खो गए थे…


राज :- चुप कर तू कुछ भी बोलता रहता है… जानता है ना जब से श्रेयांश पापा गए है पापा कितने उदास रहते है….।।


वेदांत :- नहीं बेटा ऐसा कुछ नहीं है अब हम घर चलते  है…


वेदिका :- तुम दोनों को बिल्कुल भी अक्ल नहीं है ना कब क्या बोलना चाहिए… पापा को फिर से उदास कर दिया ना…


दोनों साथ में… वेदिका दीदि… आप हमसे बड़ी है इसका मतलब ये नहीं हर वक़्त आप हमें  डांटती रहेगी…


घर पहुंचते पहुंचते रात हो जाती है….


वेदांत तीनों बच्चों को सुला कर अपने कमरे में आता है… सामने दीवार पर सात तस्वीरें लगी थी जिन पर हार चढ़ा हुआ था… वेदांत उन तस्वीरों की तरफ़ देखता है...वह तस्वीरें राज,हिमांशु,वेदिका, राजवर्धन, हर्षवर्धन,शांति और श्रेयांश की थी...।।


तभी श्रेयांश की आत्मा एक बार फिर वेदांत के सामने आती है…


श्रेयांश की आत्मा :- कब तक हम सब को याद करते रहोगे वेदांत…??? हम लोग जा चुके है...।।


वेदांत :- जानता हूं मैं पर क्या करूं ….उस रात मैंने अपना सब कुछ खो दिया … पापा, चाचा, चाची को खो दिया …. तुम्हे खो दिया...अब तो यह बच्चें है जिनके लिए मैं जी रहा हूं वरना मैं भी कब का मर गया होता…


श्रेयांश की आत्मा :- उस बात को तीन साल हो गए है… मैंने तुमसे मेरे आखिरी वक़्त में क्या कहा था…. भूल गए क्या तुम…


वेदांत :- कुछ नहीं भुला हूं मैं…. मुझे आज भी वह रात याद है...।।

तीन साल पहले…


श्रेयांश हॉस्पिटल में एडमिट था …. उसकी तबीयत बहुत खराब थी… ऐसा लग रहा था उसके शरीर में जान बची ही ना हो… वेदांत उसके पास ही था…


इधर वेदांत का परिवार श्रेयांश को देखने मुंबई आ रहा था …. रास्ते में उनकी कार का एक्सिडेंट हो जाता है … जिसमें उन तीनों की जान चली जाती है...।।


हॉस्पिटल में वेदांत को फोन आता है कि उसके परिवार की एक्सिडेंट में मौत हो गई …. वह चाह के की कुछ नहीं कर सकता था… ऐसा लग रहा था जैसे भगवान आज उससे सब कुछ छीन लेगा….


हॉस्पिटल में श्रेयांश की तबीयत बहुत बिगड़ने लगती है … वह वेदांत से कहता है…


श्रेयांश :- मेरे जाने के बाद तुम अपनी ज़िन्दगी को वही पर रोक मत लेना बल्कि आगे बढ़ना … और हो सके तो फिर से किसी से प्यार करना … उसे अपनी ज़िन्दगी में शामिल करना… मैं तो हमेशा तुम्हारे दिल में रहूंगा...हमारे बच्चों का ख्याल रखना...मुझसे वादा करो वेदांत तुम फिर से प्यार करोगे …. अपनी ज़िन्दगी अकेले नहीं जियोगे….वादा करो मुझसे…


वेदांत :- नहीं मैं यह वादा नहीं कर सकता मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकता ...।।


श्रेयांश :- मेरे पास ज़्यादा समय नहीं है प्लीज़ मेरा वादा पूरा करना...।।


और इतना कहते ही श्रेयांश अपनी आंखे बंद कर देता...।।।


उस रात ने वेदांत का सब कुछ उससे छीन लिया…. 


वर्तमान समय में…


वेदांत :- तुमने तो कहा दिया किसी और को अपनी ज़िन्दगी में शामिल कर लो पर मैं कैसे किसी को तुम्हारी जगह दे दू...।।


श्रेयांश की आत्मा :- तुम्हे पता है मेरी आत्मा भटक रही है जब तक तुम मेरी आखिरी इच्छा पूरी नहीं करोगे मुझे मुक्ति नहीं मिलेगी...। 


वेदांत :- मैं चाह के भी तुम्हारी यह इच्छा पूरी नहीं कर सकता .. अगर तुम्हारी यह इच्छा मैने पूरी कर दी तो… तुम मुझे हमेशा के छोड़ के चले जाओगे… ।।


श्रेयांश :- मेरी इच्छा पूरी करो वेदांत मेरी आत्मा भटक रही है ….

इतना कह कर श्रेयांश की आत्मा वहा से चली जाती है…


अगले दिन सुबह…


फोन की बार बार बजती घंटी से वेदांत की नींद टूटती है...।।।


वह बिना देखे ही फोन उठा लेता है..


सामने से आवाज आती है:- कुंभकर्ण है क्या… कितनी देर से फोन कर रहा हूं … आज कॉलेज का पहला दिन है इतनी देर तक सो रहा है तू ..।।


वेदांत नींद में ही :- हां….कल रात को देर से सोया तो नींद नहीं खुली….

वह सोचता है कॉलेज तो मेरा कब का पूरा हो गया है… फिर यह कौन है जो मुझे कॉलेज ले जा रहा है...।।


उधर से तब तक आवाज आती है:- अब रात भर वैसी फिल्में देखेगा तो नींद कहा से आएगी...।


वेदांत :- ओह! हेल्लो मिस्टर ना ही मैं वैसी कोई फिल्में देखता हूं ना ही कॉलेज में स्टूडेंट हूं मैं एक प्रोफ़ेसर हूं … आपने गलत नंबर लगाया है…


वह आवाज :- ओह! लगता है गलती से रॉन्ग नंबर लग लग गया … मैं अपने दोस्त को फोन कर कर रहा था …. माफ़ करिएगा...।।


वेदांत :- कोई बात नहीं अगली बार नंबर देख के डायल करिएगा..।। 


फोन कट हो जाता है….।।


------------------------------------THE-END----------------------------------




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