Mere Ajnabi Humsafar
Chapter_1
वो ट्रेन के रिजर्वेशन के डब्बे में बाथरूम के तरफ वाली सीट पर बैठा था... उसके चेहरे से पता चल रहा था कि थोड़ी सी घबराहट है उसके दिल में कि कहीं टीसी ने आकर पकड़ लिया तो..कुछ देर तक तो पीछे पलट-पलट कर टीसी के आने का इंतज़ार करता रहा। शायद सोच रहा था कि थोड़े बहुत पैसे देकर कुछ निपटारा कर लेगा। देखकर यही लग रहा था कि जनरल डब्बे में चढ़ नहीं पाया इसलिए इसमें आकर बैठ गया, शायद ज्यादा लम्बा सफ़र भी नहीं करना होगा। सामान के नाम पर उसकी गोद में रखा एक छोटा सा बेग दिख रहा था। मैं बहुत देर तक कोशिश करता रहा पीछे से उसे देखने की कि शायद चेहरा सही से दिख पाए लेकिन हर बार असफल ही रहा...फिर थोड़ी देर बाद वो भी खिड़की पर हाथ टिकाकर सो गया। और मैं भी वापस से अपनी किताब पढ़ने में लग गया…
लगभग 1 घंटे के बाद टीटी आया और उसे हिलाकर उठाया।
टीटी - “कहाँ जाना है बेटा”
वो - “अंकल लखनऊ तक जाना है”
टीटी - “टिकट है ?”
वो - “नहीं अंकल …. जनरल का है ….लेकिन वहां चढ़ नहीं पाया इसलिए इसमें बैठ गया”
टीटी - “अच्छा 300 रुपये का पेनाल्टी बनेगा”
वो - “ओह …अंकल मेरे पास तो लेकिन 100 रुपये ही हैं”
टीटी - “ये तो गलत बात है बेटा …..पेनाल्टी तो भरनी पड़ेगी”
वो - “सॉरी अंकल …. मैं अलगे स्टेशन पर जनरल में चला जाऊंगा …. मेरे पास सच में पैसे नहीं हैं …. कुछ परेशानी आ गयी, इसलिए जल्दबाजी में घर से निकल आया … और ज्यादा पैसे रखना भूल गया….” बोलते बोलते वो लड़का रोने लगा।
टीटी उसे माफ़ किया और 100 रुपये में उसे लखनऊ तक उस डब्बे में बैठने की परमिशन देदी।
टीटी के जाते ही उसने अपने आँसू पोंछे और इधर-उधर देखा कि कहीं कोई उसकी ओर देखकर हंस तो नहीं रहा था..थोड़ी देर बाद उसने किसी को फ़ोन लगाया और कहा कि
उसके पास बिलकुल भी पैसे नहीं बचे हैं…दिल्ली स्टेशन पर कोई जुगाड़ कराके उसके लिए पैसे भिजा दे, वरना वो समय पर गाँव नहीं पहुँच पाएगा।
मेरे मन में उथल-पुथल हो रही थी, न जाने क्यूँ उसकी मासूमियत देखकर उसकी तरफ खिंचाव सा महसूस कर रहा था, दिल कर रहा था कि उसे पैसे देदूं और कहूँ कि तुम परेशान मत हो … और रो मत …. लेकिन एक अजनबी के लिए इस तरह की बात सोचना थोडा अजीब था।
उसकी शक्ल से लग रहा था कि उसने कुछ खाया पिया नहीं है शायद सुबह से … और अब तो उसके पास पैसे भी नहीं थे। बहुत देर तक उसे इस परेशानी में देखने के बाद मैं कुछ उपाय निकालने लगे जिससे मैं उसकी मदद कर सकूँ और फ़्लर्ट भी ना कहलाऊं।
फिर मैं एक पेपर पर नोट लिखा,“बहुत देर से तुम्हें परेशान होते हुए देख रहा हूँ, जानता हूँ कि एक अजनबी हम उम्र लड़के का इस तरह तुम्हें नोट भेजना अजीब भी होगा और शायद तुम्हारी नज़र में गलत भी, लेकिन तुम्हे इस तरह परेशान देखकर मुझे बैचेनी हो रही है इसलिए यह 500 रुपये दे रहा हूँ , तुम्हे कोई अहसान न लगे इसलिए मेरा एड्रेस भी लिख रहा हूँ
…...जब तुम्हें सही लगे मेरे एड्रेस पर पैसे वापस भेज सकते हो …. वैसे मैं नहीं चाहूँगा कि तुम वापस करो ….. अजनबी हमसफ़र ”
एक चाय वाले के हाथों उसे वो नोट देने को कहा, और चाय वाले को मना किया कि उसे ना बताये कि वो नोट मैंने उसे भेजा है। नोट मिलते ही उसने दो-तीन बार पीछे पलटकर देखा कि कोई उसके तरह देखता हुआ नज़र आये तो उसे पता लग जायेगा कि किसने भेजा। लेकिन मैं तो नोट भेजने के बाद ही मुँह पर चादर डालकर लेट गया था...थोड़ी देर बाद चादर का कोना हटाकर देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कराहट महसूस की लगा जैसे कई सालों से इस एक मुस्कराहट का इंतज़ार था। उसकी आखों की चमक ने मेरा दिल उसके हाथों में जाकर थमा दिया …. फिर चादर का कोना हटा- हटा कर हर थोड़ी देर में उसे देखकर जैसे सांस ले रहा था मैं...पता ही नहीं चला कब आँख लग गयी।
जब आँख खुली तो वो वहां नहीं था … ट्रेन दिल्ली स्टेशन पर ही रुकी थी। और उस सीट पर एक छोटा सा नोट रखा था ….. मैं झटपट मेरी सीट से उतरकर उसे उठा लिया .. और उस पर लिखा था …
Thank You मेरे अजनबी हमसफ़र …..आपका ये अहसान मैं ज़िन्दगी भर नहीं भूलूंगा …. मेरी माँ आज मुझे छोड़कर चली गयी हैं …. घर में मेरे अलावा और कोई नहीं है इसलिए आनन – फानन में घर जा रहा हूँ। आज आपके इन पैसों से मैं अपनी माँ को शमशान जाने से पहले एक बार देख पाऊँगा …. उनकी बीमारी की वजह से उनकी मौत के बाद उन्हें ज्यादा देर घर में नहीं रखा जा सकता। आज से मैं आपका कर्ज़दार हूँ ….जल्द ही आपके पैसे लौटा दूंगा। उस दिन से उसकी वो आँखें और वो मुस्कराहट जैसे मेरे जीने की वजह थी
…. हर रोज़ पोस्टमैन से पूछता था शायद किसी दिन उसका कोई ख़त आ जाये …. आज 1 साल बाद एक ख़त मिला ….आपका क़र्ज़ अदा करना चाहता हूँ …. लेकिन ख़त के ज़रिये नहीं आपसे मिलकर … नीचे मिलने की जगह का पता लिखा था …. और आखिर में लिखा था ...
तुम्हारा अजनबी हमसफ़र ……
Chapter_2
उस खत को पड़ के ऐसा लगा मानों मैं जन्नत की सैर कर रहा हूं। दुनिया की सारी खुशियां जैसे मुझे मिल गई हो, उस खत को में उलट पलट के देखने लगा कि भेजने वाले का नाम और पता क्या है?
आखिरकार मुझे उसका नाम और पता मिल गया उसका नाम बड़ा ही "हिमांशु वर्मा" और उसका पता भी था "वसंत कुंज, लखनऊ, उत्तर प्रदेश 226020" ।
वो ख़ास कर मुझसे मिलने लखनऊ से दिल्ली आ रहा था। ये बात मुझे अंदर तक उत्साहित कर रहीं थीं, मैं उस पल कैसा महसूस कर रहा था ये मै शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता।
आप सब समझ सकते होगे की मैं उस वक़्त सातवें आसमान पर था। अब मैं हिमांशु से मिलने के लिए बेचैन हो रहा, मुझसे इंतेज़ार ही नहीं हो रहा था। इन एक सालों में मुझे उससे बेइंतेहा प्यार हो गया ।
ख़ैर वह अलगे हफ़्ते आनेवाला था । जब मैंने एक साल इंतेज़ार किया है तो एक हफ्ता भी कर लूंगा । वह मुझसे CP मे मिलने वाला था । मैं बेसब्री से उसके आने का इंतजार करने लगा।
जैसे तैसे कर के वो दिन आ ही गया जब मैं उससे मिलने वाला था । उसने चार बजे को आने के लिए कहा था , पर सुबह से ही उसका इतेजार कर रहा था । मैं घड़ी के तरफ़ बार बार देख रहा था कि कब चार बजेगे कब मुझे मेरे प्यार का दीदार हो गए । मैं तो घर से ही सोच कर आया था कि आज ही उसे प्रपोज कर दूंगा ।
मैं अपने ख्यालों में इतना खो गया था कि ये भूल गया था कि क्या वो भी मुझसे प्यार करता है ? क्या उसके दिल में भी मेरे लिए वही एहसास होगे जो मेरे दिल में है? कहीं मेरा प्यार एक तरफा तो नहीं ?
अब ये सब सोच कर मुझे चिंता होने लगी । उसके मन में क्या है ये तक नहीं जानता । अगर कहीं मैंने उसे प्रपोज किया और वो नाराज हो कर चला गया तो हम दोस्त भी नहीं बन पाएंगे।
इसलिए मैंने प्रपोज करने का विचार अपने दिल से निकाल दिया और दोस्ती से इस नए रिश्ते की शुरुवात करनी चाहिए ।
चार बजने में कुछ मिनट ही बचे थे मैं पार्क के गेट की तरफ ही देख रहा था । चार बज कर पंद्रह मिनट हो गए , मुझे लगा अब वो नहीं आएगा । पर कोई दौड़ता हुआ दूर से आता हूं दिखाईं दिया जैसे ही गेट के सामने पहुंचा मैं उसे देखता ही रह गया । ये वही था वैसे ही मासूम चेहरा वैसे ही भोलापन उसके चेहरे पर दिख रहा था । पर आज उसके चेहरे पर कोई चिंता कि लकीरें नहीं थी, शायद वक्त ने उसके सारे गमों को कम कर दिया है ।
वो मुझे नहीं पहचान पाया वो पार्क में इधर उधर देख रहा था। मैं समझ गया उसने मुझे कभी देखा ही नहीं और नहीं उसे मेरा नाम पता हैं तो पहचानेगा कैसे? मैं उसके पास गया और कहा -
मैं - किसी को खोज रहे है आप,
हिमांशु - जी वो मै यहां किसी से मिलने आया था पर हम कभी मिले नहीं है, और ना ही मुझे उनका नाम पता है , इसलिए मै उन्हें पहचानता नहीं हूं ।
मैं - कमाल है पहले कभी मिले नहीं और नहीं उनका नाम पता है फिर भी उससे मिलने लखनऊ से इतनी दूर आए गए।
हिमांशु - जी आपको कैसे पता हम लखनऊ से है, आप वही है ना जिससे मैं मिलने आया हूं।
( मेरी चोरी पकड़ी जा चुकीं थीं इसलिए अब और नाटक नहीं कर सकता था)
मैं - जी आप तो बड़े तेज हो झट से पहचान गए,
वैसे मेरा नाम राज है।
हिमांशु - हाई! राज मैं हिमांशु
राज - मुझे पता है आपका नाम
हिमांशु - कैसे मैंने तो अभी तक आपको अपना नाम नहीं बताया , ओह अभी याद आया मैंने खत के पते पर अपना नाम लिखा था।
आपका बहुत बहुत शुक्रिया अगर उस दिन आपने ने मेरी मदद नहीं की होती तो शायद मैं वक़्त पर अपने घर ना पहुंच पाता । मैं आपके 500 रूपए लाया हूं
राज - अब आप मुझे शर्मिंदा कर रहे है आप ये रुपए अपने पास ही रखे मुझे इनकी कोई ज़रूरत नहीं है
वैसे आप यहां दिल्ली किसी काम से आए थे या सिर्फ़ मुझसे मिलने आए है।
हिमांशु - नहीं ऐसी कोई बात नहीं वो मेरी नौकरी यहां की एक मल्टी नेशनल कम्पनी में लगी और आप भी यही थे तो सोचा जब यहां आए ही रहा हूं तो आपसे भी मिल लूं और शुक्रिया अदा कर दी ।
राज - ओह! ये बात है ( धीरे से) मुझे लगा आप सिर्फ मुझसे मिलने आए हों ।
हिमांशु - कुछ कहा आपने,
राज - नहीं, मैं यह कह रहा था कि अब तो तुम यही रहोगे तो मिलना होता रहेगा वैसे कहीं रूम लिया या नहीं?
और को से कंपनी में जॉब लगी है।
हिमांशु - हां मां के जाने के बाद मेरा वहा लखनऊ में मन नहीं लग रहा था और पापा तो मेरे बचपन में ही गुज़र गए थे, इसलिए यहां जॉब के लिए अप्लाई किया और जॉब मिलते ही वहां की ज़मीन बेचकर यहां गया और कंपनी के पास ही एक फ्लैट ले लिया है , अब यही रहना है तो सोचा आपसे मिल लू । इस अनजान शहर में कोई तो अपना हो जिसे दोस्ती की जा सके ।
राज - मैंने तो बस कंपनी का नाम पूछा था? ख़ैर रहने दीजिए अब तो आप दिल्ली में ही तो मिलना तो लगा ही रहेगा
हिमांशु - आपने बिल्कुल सही कहा । अच्छा जी अब मुझे चलना चाहिए कल ऑफिस का पहला दिन है और और राशन भी लेना है।
राज - यहां पास ही में एक सुपर मार्केट है आप चाहे तो वह से सारा सामान ले सकते है अगर आप बुरा ना माने तो मैं आपकी मदद कर सकता हूं
हिमांशु - हां जी जरूर वैसे भी इस शहर में मैं नया हूं यहां का कुछ भी पता नहीं मुझे तो आप मेरी मदद कर सकते है।
दोनों राशन खरीदेने के लिए वहां से निकल जाते है
Last_Chapter
दोनों राशन लेकर हिमांशु के फ़्लैट पर जाते है, राज ये देखकर खुश होता है कि ये तो उसी की बिल्डिंग है जहां वो रहता है पर कुछ कहता नहीं….
राज - कोन सा विंग है?
हिमांशु - B wing flat number 23D
राज - उसके फ़्लैट पर सारा सामान रखने में हिमाशु की मदद करता है। हमारे बीच एक और नया रिश्ता जुड़ गया ।
हिमांशु - कोन सा रिश्ता??
राज - ये सामने वाला फ़्लैट मेरा है इस वजह से हम एक दूसरे के पड़ोसी हुए।
हिमांशु - ओह मुझे पता ही नहीं था कि आप यही रहते नहीं तो मैं आपसे मिलने आपके फ्लैट पर ही आ जाता।
राज - अभी आप आराम कीजिए, कल ऑफिस भी जाना है कुछ भी चाहिए होगा तो मुझसे कह सकते है।
हिमांशु - जी जरूर, आप पहली बार मेरे यहां आए है तो एक कप चाय तो पी के ही जाने दूंगा आपको।
राज - अरे वाह नेकी और पूछ - पूछ ।
चाय पीने के बाद राज अपने फ़्लैट पर वापस आता है और सोचता है कि किस्मत भी हम दोनों को मिलाने की कोशिश कर रही है क्या मुझे प्रपोज कर देना चाहिए।
अगले दिन सुबह जब राज ऑफिस जाने के लिए तो उसने सोचा हिमांशु को भी साथ में लेकर चलता हूं
उसके फ़्लैट के पास पहुंचा तो वहां ताला लगा हुआ था।
शायद वह सुबह जल्दी निकल गए होगे ये सोचकर राज अपने ऑफिस के लिए निकल जाता है।
राज अपने ऑफिस पहुंचता है तो देखता है हिमांशु वहा पहले से ही था , उसके पास जाकर उससे बात करने लगता है।
राज - आप यहां कैसे???
हिमांशु - यही पर मेरी जॉब लगी है ।वैसे आप यहां कैसे??
राज - क्या बात है अब तो हम कॉलीग्स भी बन गए है मैं भी यही काम करता हूं ।
हिमांशु - ये तो अच्छी बात है , अब मुझे यहां अकेलापन नहीं लगेगा , मैं आपसे लंच में मिलता हूं।
लंच के वक़्त
राज - वैसे हिमांशु तुम्हे आज कल में एक पार्टी अपने फ़्लैट पर रखनी चाहिए जिसमें ऑफिस के सारे स्टाफ को invite कर देना इससे सबसे तुम्हारी दोस्ती भी हो जाएगी।
हिमांशु - हम्म अच्छा आइडिया है।
राज - तो आज को ही पार्टी रख लो।
राज अपने मन में आज शाम को मैं हिमांशु को प्रपोज कर दूंगा, चाहे उसका जवाब हा हो या ना पो पर मुझे उसे अपने दिल की बात बतानी ही होगी अब और इंतेज़ार नहीं कर सकता मैं।
शाम को पार्टी में….
राज और हिमांशु ने मिलकर पार्टी की सारी तैयारियां कर ली थी।
राज के कुछ फ्रेंड भी इस पार्टी में आए थे जिनमें उसका बेस्ट फ्रेंड राहुल भी था । राहुल को राज के बारे में सब पता है वो ये भी जानता है कि राज , हिमांशु से बहुत प्यार करता है । इसलिए आज वह भी उसकी मदद करेगा हिमांशु को प्रपोज करने में।
राहुल - सब कुछ प्लान कर लिया ना ।
राज - हा यार सब सेट है पर अगर उसने ना कर दिया तो मेरा क्या होगा में तो टूट ही जाऊंगा ।
राहुल - तू टेंशन ना ले सब ठीक ही होगा और मुझे लगता वो ना नहीं करेगा वो भी तुमसे प्यार करता है वरना तुहि सोच वो तो कहीं भी जॉब कर सकता है फिर भी उसने दिल्ली ही क्यों चुना और भगवान भी तेरे साथ है तभी तो तेरे ही फ़्लैट के सामने उसका फ़्लैट तेरे ही ऑफिस में जॉब ये कोई इतेफाख नहीं है
राज - कह तो तू सही रहा है ।
राहुल - दोस्तो! ये पार्टी कुछ बोरिंग नहीं हो रही है क्यों ना Truth and Dare खेला जाए ।
सब मान जाते है और गोले में बैठ जाते है
राहुल बॉटल घूमता है बारी बारी से सबका नंबर आता है कोई truth लेता है तो कोई dare अब बारी हिमांशु की थी ।
राहुल - तुम्हे तो truth ही लेना पड़ेगा
हिमांशु - ठीक है
राज - सवाल में पुच्छुगा तो सवाल है की क्या तुम्हे किसी से प्यार है और उसका नाम का पहला अक्षर क्या है।
हिमांशु - हा में किसी से बेहिंतिहा प्यार करता हूं उसका नाम का पहला अक्षर आर( R) हैं।
राज ये सुनकर बहुत खुश होता है।
अब बारी राज की थी तो राज ने dare लिया। और राहुल ने उसे किसी को प्रपोज करने का dare दिया।
राज घुटनों के बल हिमांशु के सामने बैठ गया और उसका हाथ अपने हाथों में लेकर कहना शुरू किया….
राज - हिमांशु मैंने तुम्हे पहली बार उस ट्रेन में देखा था ।
तुम बहुत ही परेशान लग रहे थे , पर उसी समय मुझे तुम्हारी मासूमियत से प्यार हो गया था इसलिए तुम्हारी मदद कि । उस लेटर में मैंने अपना पता इसलिए दिया था कि तुम मुझे कॉन्टेक्ट करोगे पर तुमने कॉन्टेक्ट करने में एक साल लगा दिया । मुझे पता है तुम्हारी लाइफ में उस वक़्त बहुत सारी समस्या थी । पर इन एक सालों में मेरे दिल में तुम्हारे लिए प्यार और बड़ गया ।मुझे ये भी नहीं पता तुम मुझसे प्यार करते हो ना नहीं पर फिर भी मैं अपनी पूरी जिंदगी तुम्हारे साथ बित्ताना चाहता हूं । मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं I love you so much हिमांशु।
तुम्हारा जवाब अगर ना हुआ तो मैं चुप चाप यहां से चला जाऊंगा फिर कभी तुम्हारी ज़िन्दगी में नहीं आउगा।
हिमांशु के आंखों में आंसू थे उसने राज को खड़ा किया और कहना शुरू किया
हिमांशु - मैं कब से इस दिन का इंतेज़ार कर रहा था अगर आज प्रपोज ना करते तो मैं ही करने वाला था ।
पर डर इस बात का था कि मैं तक नहीं जानता था कि आपको लड़के पसंद है या नहीं इसलिए कुछ बोल ना पाया और अपनी फीलिंग्स को दिल में ही रखा रहा ।
अगर मैंने कुछ कहा तो हमारी ये दोस्ती भी ना टूट जाए, इसलिए कुछ ना बोला ।
मैं भी उसी दिन से आपसे प्यार करने लगा था ।
मैंने अपनी ज़िन्दगी में सब कुछ खो दिया है । आपको नहीं खोना चाहता , मैं भी आपसे प्यार करता हूं
I love yo you too…… Raj
राहुल ये देखकर बहुत खुश होता है । सभी एक साथ शोर करना शुरू कर देते है …. Kiss, kiss , kiss
राज हिमांशु के पास जाता है और उसके होठों पर अपने होंठ रख देता है और दोनों एक दूसरे को जी भर के चूमते है।
ये देखकर राहुल बोलता है
राहुल - ओ! हेल्लो अभी हम सब यही है हमारे सामने ही सुहागरात मनाने का इरादा है क्या ।
ये सुनकर हिमांशु शर्मा जाता है और राज से अलग हो जाता है
राज - हा तो पार्टी तो वैसे भी खत्म हो गई है तो आप सब अपने घर जा सकते है , क्यों कबाब में हड्डी बन रहे है
राहुल - हा भाई अब प्यार मिल गया तो दोस्त कोन याद रखेगा चलो भाहियों इन दोनों love bird's को अपनी सुहाग रात मानने दो ।
सब लोग चले जाते है हिमांशु उन लोगो को रोक रहा था कि ऐसा कुछ नहीं है वो लोग ना जाए।
राज - कोई फायदा नहीं सब को जाने दो । अब यहां सिर्फ़ हम दोनों है । पूरे एक साल बाद तुम मिले हो ।
बहुत तड़पाया है तुमने अब और नहीं ।
राज, हिमांशु को अपनी गोद में उठाकर बेडरूम में ले जाता है, और किस करते हुए कमरे की लाइट को बंद कर देता …….
दोस्तो कमरे कि लाइट बंद होने के कारण मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा है इसलिए आगे में कुछ नहीं लिख पाया । 😁😁😁
वैसे आप सब काफी समझदार है तो समझ ही गए होंगे कि आगे क्या हुआ होगा ….😂😂😂
ये कहानी यही खत्म होती है आपसे फिर मिलेंगे एक नई कहानी के साथ … तब तक सोचते रहिए आगे क्या क्या हुआ होगा और कैसे कैसे हुआ होगा😂😂😁😁
।।।।।The End।।।।।

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